जमुई : फरार अभियुक्तों के खिलाफ बढ़ी पुलिस की दबिश, निर्दोष लोगों से की गांव वापस आने की अपील

लाइव सिटीज, जमुई/राजेश कुमार : बीते 5 अगस्त को अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन के बाद जमुई जिले के बुकार गांव में निकाली गई शोभा यात्रा को लेकर दो पक्षों के बीच उत्पन्न तनाव के बाद एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. अब इस मामले में पुलिस की दबिश फरार अभियुक्तों के खिलाफ बढ़ गई है. जमुई पुलिस ने बुधवार को बुकार पहुंच कर यह ऐलान किया कि जो निर्दोष हैं वे पुलिस से डरें व भागे नहीं बल्कि गांव लौट कर सामान्य जीवन बसर करें.

इसके साथ ही पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर फरार अभियुक्तों के घरों पर बुधवार को न केवल इश्तेहार चस्पा किया बल्कि ये निर्देश भी दिया कि वो कनून का सम्मान करते हुए सोमवार तक कोर्ट में आत्मसमर्पण करें अन्यथा कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की जाएगी. हत्याकांड मामला के अनुसंधानकर्ता एके आजाद बुधवार को पूरे दल-बल के साथ नवकाडीह बुकार गांव पहुंचे और माइकिंग के जरिए गांव के लोगों से अपील किया कि वो 5 अगस्त को बानपुर गांव के मो. इबरान खां हत्या मामले में फरार 13 नामजद अभियुक्तों को जल्द से जल्द कोर्ट में या पुलिस के समक्ष सरेंडर करा दें अन्यथा आगे पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी.



गांव के लोगों के बीच माइकिंग द्वारा संदेश देने के बाद पुलिस ने 13 फरार अभियुक्तों के घरों पर इश्तेहार चस्पा किया. पुलिस द्वारा इश्तेहार चस्पा करते वक्त घरों में ताले लटके थे. मो. इबरान खां हत्या मामले में 25 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें दो महिलाएं भी शामिल थीं. इन 25 अभियुक्तों में से दो महिला सहित 12 अभियुक्तों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और शेष 13 की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा न केवल छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है बल्कि पुलिस की दबिश भी बढ़ा दी गई है.


इस मामले में जमुई के पुलिस कप्तान प्रमोद कुमार मंडल ने बताया कि ऐसे मामले में पुलिस की जितनी भी शिकायत या निंदा हो उसकी उन्हें परवाह नहीं. पुलिस कप्तान ने कहा कि बुकार गांव में हुई मो. इबरान खां हत्या मामले में जिन लोगों को भी नामजद किया गया है, उन्हें हर हाल में कानून का सम्मान करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि तय तिथि के अंदर अगर फरार अभियुक्त सरेंडर नहीं करते हैं तो पुलिस द्वारा उनके घरों की कुर्की-जब्ती की जाएगी. एसपी ने बुकार गांव के लोगों से एक बार फिर अपील किया कि निर्दोष लोग गांव वापस आएं और अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने का प्रयास करें.