NIA ने बताया, यहां खप रहे हैं 500-1000 के प्रतिबंधित नोट, बदल भी जायेंगे

लाइव सिटीज (ज्ञानेश्वर) : पिछले 30 वर्षों से मैं क्राइम रिपोर्टिंग कर रहा हूं. पुलिस रिपोर्टर कभी नहीं बना. हमेशा तह तक जाने की कोशिश की. बड़े क्राइम-स्कैम देखे. लेकिन पिछले कुछ दिनों से बड़े उलझन में था. यह उलझन बुधवार 17 जनवरी 2018 को तब और बढ़ गई, जब पता चला कि कानपुर में खत्री बंधुओं से 97 करोड़ रूपये के 500-1000 वाले पुराने नोट बरामद किये गए हैं. इसके पहले मेरठ में 25 करोड़ के प्रतिबंधित नोट मिले थे. खबर के मुताबिक़ दोनों शहरों में देश भर से लोग बंद वाले 500-1000 के पुराने नोट बदलने के लिए आते थे.

मेरठ-कानपुर के ऑपरेशन की लीड NIA (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) ने स्टेट पुलिस को दी थी. कानपुर के बाद पटना की बात भी चल पड़ी है, लेकिन ठिकाना अभी मिला नहीं है. खैर, ठिकाना जब मिले, मेरे जैसे क्राइम रिपोर्टर के लिए यह जानना जरुरी था कि किसी भी प्रतिशत में इन रुपयों को बदला कैसे जा रहा है. कानपुर की ही बात करें, तो खबर आई कि 1000 के पुराने नोट के बदले 150 रूपये मिल रहे थे. मतलब 15 प्रतिशत. 100 करोड़ का हिसाब लगाएं, तो गणित यह कि पुराने 100 करोड़ के बदले 15 करोड़ अभी चलने वाले नोट मिलेंगे. फिर से सवाल मेरे लिए यहीं उलझा कि आखिर बेकार हो चुके 100 करोड़ के बदले कोई भी 15 करोड़ रूपये का नया नोट क्यों देगा ? यह खेल आखिर चल कैसे रहा है ?

प्रतीकात्मक फोटो

तह तक जाने को मैंने यूपी पुलिस के अधिकारियों से बात की. बैंक के बड़े अधिकारियों को संपर्क साधा. लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला. आखिरकार, टटोलते-टटोलते NIA के अधिकारियों को भरोसे में लिया. अब जाकर यह खेल खुला. बहुत आसान खेल है. रास्ता सरल है. और अंत में यह भी लग रहा है कि इस भूल ने भारत में Demonetization के नरेंद्र मोदी के मेगा प्लान को पंक्चर कर दिया है.

चलिए नेपाल, आपका इंतजार हो रहा है

NIA के सूत्र बताते हैं कि नेपाल में 500-1000 के पुराने नोटों का बाजार अब भी सजा है. ठीक से जांचेंगे, तो नेपाल में ये नोट आपको चलन में दिख जायेंगे. ध्यान रखें, भारत में 500 और 2000 के नए नोटों को नेपाल की सरकार ने अबतक मान्यता नहीं दी है. इसके पीछे फंसा पंगा बहुत बड़ा है. और इसी पंगे ने भारत के वैसे अवैध कारोबारियों को नेपाल में स्पेस उपलब्ध कराया है, जो 15 प्रतिशत वापसी की शर्त पर आज भी 500-1000 के पुराने नोट ले रहे हैं. जाहिर तौर पर, बड़े मुनाफे के लिए भारत की इकॉनमी को चौपट करने वाले इस धंधे में बहुत बड़ी धनराशी का निवेश किया गया है.

नेपाल में यह धंधा इसलिए पसरा, क्योंकि अब तक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने नेपाल के बैंकों और नेपाल सरकार से 500-1000 के पुराने नोटों की वापसी का फैसला लटका रखा है. ऐसे में, नेपाल जानता है कि जब भी फैसला होगा, भारत को नेपाल से 500-1000 वाले पुराने नोट वापस लेने ही होंगे. NIA को इस बात की भी खबर है कि इस लालच में नेपाल के कई प्राइवेट बैंक भारत में 500-1000 के पुराने नोटों के धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं. कारण यह कि इन प्राइवेट बैंकों को पता है कि फैसला जब भी हो, फायदा जबरदस्त होगा.

अरुण जेटली के बयान से नेपाल को बल मिला

भारत में 1 जनवरी 2017 से पुराने 500-1000 के नोटों को पास में रखना भी गुनाह हो गया. लेकिन समझौते की आस में नेपाल में ऐसा नहीं हुआ. भारत के नए नोट नहीं चले. पुराने नोट चलते रहे. भारत के धंधेबाजों ने इसे सूंघ लिया और फिर सिंडिकेट ने काम करना स्टार्ट किया.

3 मार्च 2017 को भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक बयान ने नेपाल के धंधेबाजों का भारत के धंधेबाजों के साथ गठजोड़ और मजबूत किया. न्यूज़ एजेंसी PTI की इस रिपोर्ट को पढ़ें – ‘Finance Minister Arun Jaitley announced that Nepal would soon get exchange facilities for the demonetised high-value indian currency notes to ease difficulties faced by Nepalese citizens. He said Nepal Rastra Bank (NRB) and the Reserve Bank of India (RBI) would set a modality of exchange soon and settle the related issues.’

अरुण जेटली के इस बयान के बाद ही नेपाल के धंधेबाजों ने मान लिया कि धंधा चोखा है, खूब कमाया जा सकता है. ध्यान रखें, इसके बाद ही भारत में सिंडिकेट बनने शुरू हुए.

नेपाल को भरोसा ऐसा मिला है

बिज़नस स्टैण्डर्ड के 26 मार्च 2017 के अंक को देखें. न्यूज़ एजेंसी IANS ने काठमांडू डेटलाइन से खबर दी है कि ‘ The Reserve Bank of India (RBI) will allow an exchange of up to Rs 4500 in banned Indian currency notes to each Nepali national, a visiting team of the indian central bank in Kathmandu hinted on Sunday.’

भारत के रिज़र्व बैंक की ओर से मिले इस संकेत के बाद नेपाल में हड़कंप मचा और साथ में अवैध बदलान का मार्केट भी पसरा. कारण कि नेपाल के नागरिकों को 25000 रूपये भारतीय करेंसी रखने की अनुमति मिली हुई है. इस कारण जायज लोग तो घबरा गए, पर दूसरे जान गए कि भारत में प्रतिबंधित रूपये नेपाल में अब भी बदले जायेंगे. ऐसे में, प्राइवेट बैंकों ने खेला शुरू किया, जो आज तक जारी है.

काठमांडू के कैसिनो में अब भी चल रहे हैं बंद नोट

नेपाल की राजधानी काठमांडू में बड़ी संख्या में कैसिनो हैं. साथ में, वैध-अवैध डांस बार भी. NIA को पता है कि यहां अब भी भारत के 500-1000 के बंद नोट चल रहे हैं. शर्त इतना है कि आपको कैसिनो में टोकन खरीदने होंगे और डांस बार में रूपये लुटाने होंगे. टोकन से जीत गए तो वापसी में वैध नेपाली करेंसी मिलेगी. प्रतिशत का रिवाज ऐसे है कि आप इन कैसिनो और डांस बार में 500 का पुराना नोट देने पर 400 नेपाली नोट हासिल कर सकते हैं. पर जब आप भारत के वैध नए 500 का नोट देंगे तो बदले में 800 का नेपाली नोट मिलेगा. नेपाल यह मानने को तैयार नहीं है कि कैसिनो की इस प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ है.

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