कमीशन मांग रहे थे जमुई के बरहट प्रखंड बीसीएम शैलेन्द्र कुमार, आशा दीदी ने पीटा

जमुई, राजेश कुमार: कोरोना काल में आशा कार्यकर्ताओं के सेवा के बदले सरकार ने उन्हें को 3000-3000 हजार रुपये का मानदेय भेजा था. इस तीन हजार रुपये में से बीसीएम महोदय 50% मांग रहे थे. आशा कार्यकर्ताओं के बहुत सारे शिकायत पूर्व में भी मेरे पास आये थे. मैंने सीएस से भी इनकी शिकायत की थी मगर ये महोदय माने नहीं. रात बे रात बेचारी आशा कार्यकर्ता गांव के प्रसव पीड़ा से ग्रसित महिलाओं को लेकर अस्पताल आती हैं. रात- रात भर अकेले अस्पताल में रहती हैं और इस बेशर्म महोदय को इनके हरेक माह के मानदेय में भी कमीशन चाहिए होता था.

इधर आशा कार्यकर्ताओं में स्वीटी, रागिनी, रीता,रेणू, रेखा,बेबी आदि ने बताया की डीसीएम और एकाउंटेंट द्वारा लगातार नजराना मांगा जाता रहा है. इन लोगों ने बताया की उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है.



मामले पर जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने कहा है कि आशा कार्यकर्ताओं का भुगतान करना सरकार की प्राथमिकता है. मामले की जांच की जाएगी. और भुगतान में विलंब के लिए जो भी उत्तरदायी होंगें उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.