पप्‍पू यादव बोले : अंबानी – मित्‍तल Co Accused होते तो बाइज्‍जत बरी होते लालू प्रसाद

लाइव सिटीज, पटना : बिहार की पॉलिटिक्‍स बदल रही है. अब लालू यादव के पक्ष में मधेपुरा के सांसद पप्‍पू यादव ने बड़ी बात कही है. वे कहते हैं – चोरी/घपले के खिलाफ सदैव रहा हूं. लेकिन कानून की गैर बराबरी पर आंखें मूंदे भी नहीं रह सकता. तभी तो कह रहा हूं कि चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद के साथ सह-अभियुक्‍त अंबानी-टाटा-मित्‍तल होते तो 1 लाख 76 हजार करोड़ के 2G  स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले की तरह बाइज्‍जत बरी हो जाते.

पप्‍पू यादव कहते हैं कि यह देश ऐसा बन गया है कि अंबानी-मित्‍तल टाइप लोग कितना भी बड़ा स्‍कैम कर लें, उन्‍हें कोई सजा नहीं मिलेगी. देश गवाह है कि बैंकों का हजारों करोड़ रुपया डकारे विजय माल्‍या को कैसे देश से भागने दिया गया. लाखों करोड़ का गलत लोन लेकर ऐश करने वाले देश के मुट्ठी भर बड़े लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती.



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सांसद पप्पू यादव (फाइल फोटो)
लालू-चौटाला बदकिस्‍मत हैं

सांसद पप्‍पू यादव अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए रांची जेल में बंद लालू प्रसाद के साथ हरियाणा जेल में बंद चौटाला बंधु की चर्चा भी करते हैं. वे कहते हैं कि दोनों की बदकिस्‍मती यह है कि उनके मामलों में कोई अंबानी-टाटा-मित्‍तल को-एक्‍यूज्‍ड नहीं था. वरना टू जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले की तरह ये भी मौजूदा सिस्‍टम में बाइज्‍जत बरी हो जाते.

पप्‍पू कहते हैं कि 1 लाख 76 हजार करोड़ का घपला मामला सिर्फ डी राजा और कनिमोझी जैसे नेताओं का नहीं था. परेशानी यह थी कि जब यह कहा जाता कि इन नेताओं ने रिश्‍वत ली तो सवाल उठता कि घूस दी किसने. ऐसे में, टूजी बेनिफिशरीज के नाम आते और ये नाम टाटा-अंबानी-मित्‍तल के होते. फिर इनके नाम को आगे लाता कौन. सिस्‍टम तो इन्‍हें बचाने का बना है, चाहे ये कुछ भी कर लें. सो, कोर्ट में केस की ठीक से पैरवी नहीं की गई और सभी बरी हो गए. ऐसा लाभ लालू प्रसाद और चौटाला को तभी मिलता,जब कोई टाटा-अंबानी साथ में होता.

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लालू प्रसाद (फाइल फोटो)
मधु कोड़ा पर बोले पप्‍पू यादव

पप्‍पू यादव कहते हैं, मधु कोड़ा का कोयला घोटाला लालू यादव के चारा घोटाले से बहुत बड़ा था. फिर भी उन्‍हें, न्‍यूनतम तीन साल की ऐसी सजा दी गई, जिससे कि तुरंत जेल से छूट जाएं और अधिक राजनीतिक नुकसान न हो.

ऐसे में, यह देखना जरुरी होगा कि 3 जनवरी 2018 को लालू प्रसाद को सुनाई जाने वाली सजा कैसी होती है. निश्चित तौर पर, कानून की बराबरी दिखनी चाहिए, क्‍योंकि जुर्म की प्रकृति बराबर है.

मधु कोड़ा, एक्स सीएम, झारखंड

मधेपुरा सांसद कहते हैं कि यह भी देखा जाना आवश्‍यक होगा कि कानूनी फैसलों का राजनीतिक लाभ मतलब चुनावी लाभ लेने की कोशिश न हो. कारण कि फैसले जिस तरीके से बिहार में प्रदर्शित हो रहे हैं, साफ है कि किसी को तबाह और स्‍वयं को आबाद करने को गलत हथकंडे भी अपनाए जा रहे हैं. जातीय उन्‍माद से बिहार को बचाए रखना बिहार की प्रायोरिटी होनी चाहिए.

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