तेजस्वी के बारे में बता रहा है JDU, कहा – सुन तेजस्वी सुन, तुझ में है कितने गुण

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तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

पटना : बिहार की राजनीति इन दिनों कवितामय हो गई है. कविता और शायरी के माध्यम से ही विरोधियों पर वार-पलटवार हो रहे हैं. फिलहाल यह लड़ाई सोशल मीडिया पर जारी है राजद नेता पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह के बीच. डिप्टी सीएम तेजस्वी जहां एक ओर कविता/शायरी के माध्यम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज करते हैं, सुशासन पर सवाल उठाते हैं. वहीँ जदयू प्रवक्ता संजय सिंह भी उसी तर्ज पर तेजस्वी और उनके पिता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सवाल पूछते हैं.

इसी क्रम में आज तेजस्वी यादव के लिए कवितानुमा तंज पर संजय सिंह ने फिर उसी अंदाज में जवाब दिया है. तेजस्वी ने ‘कैसा विकास किसका विकास, 8 साल में 3 बार शिलान्यास?’ और ‘टूटते बाँध – लूटते खजाने, पूछो तो कहते रामजाने’ जैसे ताने कसे. तो उसके बाद अब जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने जो बातें कही हैं, नीचे पढ़िए –



सुन तेजस्वी सुन,
तुझ में है कितने गुण.
घोटाला करने का तुझमे धुन,
लालू यादव ने सिखाया गुण.
पढ़ाई लिखाई से वास्ता नहीं, 
खेलकूद में कोई पूछा नहीं,
लौट के बुद्धू घर को आये,
लालू घोटाले को आगे बढाए.
दिल पर हाथ रख बोल तू,
कितना काबिल है तोल तू.
धंधा क्या है खानदानी,
बता दे राजदानी.

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जदयू प्रवक्ता संजय सिंह (फाइल फोटो)

संजय सिंह ने इससे पहले बुधवार को भी तेजस्वी के कवितामयी तंज का जवाब कविता से ही दिया था. उन्होंने मुख्यमंत्री की विकास यात्रा पर किये तेजस्वी के तंज पर क्या कहा था, पढ़िए –

क्षमा-ए-यात्रा शुरू करने से पहले,
लालू के लाल बता दे बस इतना,
कहां से कमाए इतने धन ,
कहां से लाए इतनी शौकत-ए-शान.

लालू के लाल ये भी बता दें,
सीबीआई ,ईडी और आईटी,
क्यों हुए हैं तुझ पे लाल.

समाजवाद के नाटक पर ,
परिवारवाद के रक्षक ,
घोटाले के जनक ,
लालू के हो तुम लाल.

सुशासन के नाम पर,
सत्ता में प्रवेश पाये ,
फिदरत नहीं बदली,
घोटाले से ना बाज आये,
लालू के हो तुम लाल,
ये तुमने बता दिया.

इससे पहले आज गुरुवार को भी तेजस्वी यादव ने सीएम से कविता के जरिए कई सवाल पूछे. तेजस्वी यादव ने इस कविता में कई घोटाले का जिक्र भी किया है. उन्होंने कविता के अंदाज में पूछा है कैसा विकास और किसका विकास 8 साल में 3 बार शिलान्यास ? तेजस्वी ने लिखा कि भूखे को रोटी नहीं है और न गरीब को खाना मिला रहा है. लेकिन सत्ताधारी लोग शौचालय तक खा गए हैं.

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‘भूखे को रोटी ना गरीब को खाना, सत्ताधारी पार्टी तो छोडे़ ना पैखाना’
‘झांसा कुमार जवाब दो, समीक्षा-ए-विकास से पहले बताओ, क्या हुआ सात निश्चय का’