भूमिहार राजनीति को ठीक से साधने में लगे हैं नीतीश कुमार, अब नरेंद्र सिंह भी इंट्री मार रहे हैं

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लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्‍क : याद करें, पिछले दिनों नीतीश कुमार ने सवर्ण नेताओं के साथ सीक्रेट मीटिंग में कहा था – जब हम बीजेपी के साथ होते हैं, तो आगे निकल जाते हैं और जब अलग रहते हैं तो स्‍ट्राइक रेट कमजोर हो जाता है. इसे ठीक करना है.और अब सच मानिए, जदयू के स्‍ट्राइक रेट को ठीक करने की दिशा में नीतीश कुमार बहुत आगे बढ़ गए हैं.

वैसे तो जाति के वोट की चुनावी रेलगाड़ी में भूमिहार और राजपूत भाजपा के इंजन माने जाते हैं. लेकिन, नीतीश कुमार ने अब जैसी बिसात बिछानी शुरु की है, चौंकिएगा मत, जब दिखे कि भाजपा से बेहतर जदयू का स्‍ट्राइक रेट हो गया. गोलबंदी तगड़ी की जा रही है. एका का संदेशा समाज को भेजा जा रहा है. फायदा भाजपा को भी होगा.

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2014 के लोक सभा चुनाव में जदयू एनडीए से अलग था. भाजपा – लोजपा – रालोसपा ने पांच भूमिहार उतारे थे, इनमें चार बेगूसराय से भोला सिंह, नवादा से गिरिराज सिंह, मुंगेर से वीणा देवी और जहानाबाद से अरुण कुमार जीत कर लोकसभा पहुंच गए थे. अकेले भाजपा के निखिल चौधरी कटिहार में हार गए थे.

नरेन्द्र सिंह बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिल चुके हैं.

अब 2019 की सीन देखिए. भाजपा में भूमिहार घटते दिख रहे हैं, जदयू स्‍कोर करता दिख रहा है. भाजपा के भीतर गिरिराज सिंह की नवादा सीट को लेकर अब तक किचकिच जारी है. दूसरी सीट का पता नहीं चल रहा है. जबकि जदयू ने ललन सिंह के लिए मुंगेर की सीट लोजपा से झपट ली है. वीणा देवी का एडजस्‍टमेंट कहां – कैसे होगा, यह भी पूर्ण रूप से तय नहीं हो पाया है.

समझिए नीतीश कुमार की भूमिहारी बिसात

नीतीश कुमार की भूमिहारी बिसात को समझिए. ललन सिंह, नीरज कुमार और धूमल सिंह पहले से थे. लेकिन ऐसा लगा कि इतने भर से काम नहीं चलेगा. अनंत सिंह दूसरी ओर चले गए. मुंगेर में जदयू के खिलाफ ताल ठोकने में लगे हैं. पर न नीतीश कुमार और न ललन सिंह परवाह कर रहे हैं.

स्‍ट्राइक रेट को सुधारने के लिए सबसे पहले जदयू ने पटना यूनिवर्सिटी स्‍टूडेंट्स यूनियन पर कब्‍जा जमाया. धमाकेदार इंट्री की. जदयू के प्रत्‍याशी मोहित प्रकाश सीधे प्रेसीडेंट का चुनाव जीत गए. 2014 को स्‍मरण करिए. जहानाबाद में जदयू को स्‍थानीय प्रत्‍याशी नहीं मिला था. दिल्‍ली वाले बिल्‍डर अनिल शर्मा हेलीकाप्‍टर कैंडिडेट थे. हार गए. जहानाबाद के मौजूदा सांसद अरुण कुमार एनडीए में तो हैं नहीं, लेकिन किधर हैं, किसी को नहीं पता.

पर कील – कांटों को ठीक करते नीतीश कुमार को देखिए. वे जहानाबाद के सीनियर लीडर और पुराने कांग्रेसी रामजतन सिन्‍हा को अपने पाले में ले आए हैं. दरअसल, जदयू की तैयारियों से ऐसा लग रहा है कि वह जहानाबाद और पाटलिपुत्र की सीटों में से किसी एक पर भूमिहार उम्‍मीदवार को उतारना चाहती है. शर्त ये है कि पाटलिपुत्र की सीट जदयू के खाते में आए. अभी पाटलिपुत्र से भाजपा के रामकृपाल यादव हैं. लेकिन जदयू का दावा ऐसे  कि 2009 में पाटलिपुत्र में जदयू के रंजन यादव ने ही लालू यादव को हराया था, सो दावा जदयू का बनता है.

21 फरवरी को जदयू में शामिल होंगे नरेंद्र सिंह

जहानाबाद और पाटलिपुत्र की तैयारियों के बीच नीतीश कुमार गुरुवार 21 फरवरी को स्‍वयं भूमिहार समाज के बड़े बिजनेसमैन नरेंद्र सिंह को जदयू में शामिल कराने जा रहे हैं. मिलन समारोह श्रीकृष्‍ण मेमोरियल हॉल में है. नरेंद्र सिंह फ्रंटलाइन ग्रुप के चेयरमैन हैं और पालीगंज के ही रहने वाले हैं. पुसु प्रेसीडेंट मोहित प्रकाश के पिता भी.

नरेंद्र सिंह को जदयू में शामिल करा पार्टी ताकत को कई तरीके से बढ़ा रहा है. नरेंद्र सिंह की कंपनी हालांकि कई प्रदेशों में काम करती है, लेकिन खूबी ये कि इसने पचास हजार से अधिक लोगों को कई माध्‍यमों से रोजगार दिलाया है. और ये रोजगार पाने वाले अधिकांश बिहार के ही हैं.

ऐसे में, नरेंद्र सिंह को जदयू में शामिल करा पार्टी हजारों परिवार तक सीधी पहुंच बनाएगी. इतना ही नहीं, जब पटना के लोगों से नरेंद सिंह का जिक्र करेंगे, तो लोग बतायेंगे कि मर्सिडीज, बी एम डब्‍ल्‍यू और ऑडी जैसी महंगी गाडि़यों का एक साथ किसी बिहारी ने पटना में शौक पालना शुरु किया, तो ये नरेंद्र सिंह ही हैं. गांव की मिट्टी से आज भी जुड़े हैं, आगे राजनीतिक पारी कैसी रहती है, यह जानने को इंतजार करना होगा.

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