जीतन राम मांझी को भी चाहिए सम्मानजनक सीटें, नहीं तो 20 जिलों में अकेले लड़ लेंगे चुनाव

जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : ‘हम’ सुप्रीमो जीतन राम मांझी को लेकर बड़ी खबर है. मांझी का महागठबंधन से मोह भंग हो गया लगता है. वे अपनी पार्टी के साथ बिहार के 20 जिलों अथवा 20 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. मांझी को महागठबंधन में सम्मानजनक सीटें अगर नहीं मिली तो वे आगामी 18 फ़रवरी को कोई बड़ा फैसला कर सकते हैं. यह सब बातें उन्होंने खुद ही आज गुरुवार को पटना स्थित हम कार्यालय में कहीं. इससे पहले उन्होंने अपनी पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों के साथ मीटिंग भी की.

जीतन राम मांझी ने मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए जो कुछ भी कहा, वह महागठबंधन के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता है. उन्हें अब महागठबंधन में राजद के बाद सबसे ज्यादा सीटें चाहिए. कांग्रेस से भी ज्यादा. उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस कहीं नहीं है. कांग्रेस का जनाधार उनकी पार्टी से भी कम है. इसलिए उन्हें अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो अकेले ही 20 लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ेंगे. आगे सुनिए क्या कुछ कहा है मांझी ने….

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‘हम’ प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी के जिलाध्यक्षों ने आज प्रस्ताव पास कर कहा है कि वे 20 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. लेकिन इससे पहले आगामी 18 फ़रवरी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होगी. इसमें ही अंतिम फैसला लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले समस्या यह भी थी कि हमारे पास चुनाव चिन्ह नहीं था. अब चुनाव आयोग ने हमें ‘टेलीफोन’ चिन्ह के तौर पर आवंटित कर दिया है. हम अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं.

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सिर्फ लालू प्रसाद से बात करेंगे मांझी

बता दें कि बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने मंगलवार 12 फ़रवरी को ही मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा और मुकेश सहनी की अहमियत हम पार्टी से कम होनी चाहिए. अगर ऐसा नही हुआ तो हम विकल्प पर भी चर्चा करेंगे और इसके लिए भी बैठक करेंगे. हमलोग किसी के बंधुआ नही है, जरुरत पड़ी तो ऑप्शन भी देखेंगे. मांझी ने यह भी कहा है कि महागठबंधन में वे सिर्फ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से ही सीटों के लिए बात करेंगे.

हाल में चर्चा में है मांझी और ‘हम’

इससे पहले मांझी और उनकी पार्टी सवर्ण आरक्षण व इस्तीफों की ख़बरों को लेकर चर्चा में रही है. मांझी ने सवर्ण आरक्षण का समर्थन करते हुए इसे बिहार में और बढ़ाकर लागू किये जाने की मांग की थी. जबकि राजद लगातार इसका विरोध करता रहा है. वहीँ एक ही दिन में पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान और प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल के इस्तीफे से भी पार्टी की अंदरूनी कलह उजागर हुई थी. पटेल ने अपने इस्तीफे के बाद मांझी पर NDA की ओर झुकाव रखने तक का आरोप लगाया था.

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