जीतनराम मांझी ने रामविलास पासवान को कह दिया है साफ-साफ, महागठबंधन में नहीं घुसने देंगे

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : हम पार्टी के मुखिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को रामविलास पासवान पसंद नहीं हैं. यदि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान महागठबंधन में आना चाहें तो मांझी इसका विरोध करेंगे. पटना में मंगलवार को आयोजित जीतनराम मांझी ने मंगलवार को दो टूक कहा कि रामविलास पासवान का महागठबंधन में आने का हम विरोध करेंगे. हालांकि दलित मुद्दे के नाम पर एनडीए में दबाव की राजनीति कर रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि वैसे भी लोजपा के आने से महागठबंधन को कोई फायदा नहीं मिलनेवाला है. वे यहीं पर नहीं रुके. उन्होंने कहा कि महागठबंधन में कोई भी फैसला साथ मिल-बैठकर होगा. उन्होंने कहा कि दरअसल रामविलास पासवान की केंद्र सरकार में नहीं चल रही है. दलित अत्याचार अधिनियम को लेकर अध्यादेश पर वह लाचार बने हुए हैं. अध्यादेश को लेकर चिराग पासवान का बयान सिर्फ सीट शेयरिंग को लेकर दवाब बनाने की राजनीति का हिस्सा है.

मांझी ने कहा कि दलित मुद्दे पर 2 अप्रैल को भारत बंद था, तब उस समय रामविलास पासवान ने भारत बंद का विरोध किया था. अब वे किस मुंह से इस मामले में सामने आ रहे हैं. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में पुन​र्याचिका डालने में केंद्र ने बेवजह देरी की. केंद्र ने लगभग 15 दिनों के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्याचिका डाली. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया. फैसले में किसी तरह का संशोधन नहीं हुआ. और न ही लोकसभा में इसे लेकर कोई अध्यादेश लाया गया है.

बता दें कि जमुई के लोजपा सांसद चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जज एके गोयल ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर फैसला सुनाया था. इससे अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय में असंतोष और आक्रोश है. लेकिन रिटायर जज गोयल को एनजीटी में चेयरमैन बना दिया गया है. ऐसे में दलित समाज का आक्रोश और अधिक बढ़ गया है. उन्होंने यह भी लिखा है कि सरकार अतिशीघ्र रिटायर जस्टिस एके गोयल को एनजीटी चेयरमैन पद से बर्खास्त करे. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री को 8 अगस्त का समय भी दिया है. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो दलित सेना देशभर में आंदोलन करेगी.

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