जीतनराम मांझी का बड़ा बयान : दलितों को न सताएं कोई, वरना अपना लेंगे बौद्ध धर्म

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्क : हम पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्होंने यह बयान देकर बिहार की सियासत को चौंका दिया. इससे यह भी लगता है कि जीतनराम मांझी आज की जातिगत व्यवस्था से कितने नाराज हैं. उन्होंने गुरुवार को साफ कह दिया कि यदि हमारा समाज इसी तरह प्रताड़ित होता रहा तो मुझे बौद्ध धर्म अपनाने में कोई गुरेज नहीं है.

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने गुरुवार को पटना में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि इन दिनों देश में दलितों पर अत्याचार बढ़ गया है. बिहार भी इससे वंचित नहीं है. यह दलित समाज के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने कहा ​कि यदि यही स्थिति रही तो हमें कोई ठोस निर्णय लेना होगा.

जीतनराम मांझी ने कहा कि मैं अंबेडकर के रास्ते पर चलने का तैयार हूं. उन्होंने आगे कहा कि मैं अपने लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपना सकता हूं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मैं कोई दूसरा धर्म नहीं अपनाऊंगा, पर हमें बौद्ध धर्म अपनाने में कोई हर्ज नहीं है.

उन्होंने कहा कि मैं इस मसले पर अपने समर्थकों के साथ विमर्श करूंगा. उन्होंने मीडिया के पूछे जाने पर कहा कि दलित समाज को ब्राह्मणवाद के कारण पीछे रखा गया है और एक खास रणनीति के तहत हमलोगों को मुख्य धारा से अलग-थलग किया जा रहा है.

जीतनराम मांझी यहीं पर नहीं रुके. वे आरक्षण से लेकर उपेंद्र कुशवाहा तक पर भी बोले. उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में भी दलितों को आरक्षण मिलना चाहिए. जल्द ही आरक्षण के मसले पर हम पार्टी की ओर से आंदोलन किया जाएगा. आयोजित कार्यक्रम में जीतनराम मांझी के अलावा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल, महाचंद्र प्रसाद समेत कई नेता थे.

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