बिहार के CM बनने से पहले चपरासी क्वार्टर में रहते थे लालू,900 करोड़ के चारा घोटाले में हैं दोषी

लाइव सिटीज डेस्क : चारा घोटाले के एक मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा जेल में रखा गया है. 900 करोड़ के चारा घोटाले के एक मामले में सीबीआई कोर्ट ने लालू यादव को दोषी करार दिया है. सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया है. 1991 से 1994 के बीच देवघर राजकोष से 85 लाख रुपए गबन के मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराए गए हैं.



तीन जनवरी को कोर्ट उन्हें सजा सुनाएगी. बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव के एक गरीब परिवार में जन्में लालू ने अपने दम पर सीएम की कुर्सी तक का सफर पूरा किया.

15 साल तक बिहार पर राज करने वाले लालू चारा घोटाले में ऐसे फंसे कि आज उनके जेल जाने की नौबत आ गई. आइए जानते हैं लालू का सफरनामा –

लालू प्रसाद का जन्म 11 जून 1948 को हुआ था. अपने भाई-बहन में सबसे छोटे लालू बचपन में गोल मटोल थे, जिसके चलते परिवार के लोगों ने इनका नाम लालू रखा था.

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लालू प्रसाद ने गांव के स्कूलों में अपनी पढ़ई पूरी कर पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए किया.

इसके बाद उन्होंने एलएलबी की परीक्षा पास करने के बाद राजनीति में कदम रखा फिर जेपी आंदोलन से जुड़ गए.

इसी आंदोलन के नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी उनके साथी रहे हैं.

गांव से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद लालू प्रसाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए पटना चले आए.

पटना में वह अपने बड़े भाई के साथ उनके चपरासी क्वार्टर में रहते थे.

1973 में जब लालू छात्र नेता थे तब राबड़ी देवी से उनकी शादी हुई थी. उस वक्त राबड़ी की उम्र 14 साल थी.

लालू-राबड़ी के कुल 9 संतान हैं. इनमें से सात बेटियां और दो बेटे हैं. सभी बच्चों का जन्म उसी चपरासी क्वार्टर में हुआ था.

छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू करने वाले 1970 के दशक की शुरूआत में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव बने.

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लालू ने 29 साल की उम्र में पहली बार 1977 में लोकसभा चुनाव जीता. वह 1980 और 1985 में विधानसभा के लिए चुने गए.

1990 में जब बिहार विधानसभा चुनावों में जनता दल को जीत मिली, तब वीपी सिंह ने मुख्यमंत्री के पद के लिए रामसुंदर दास का पक्ष लिया था.

चंद्रशेखर रघुनाथ झा के पक्ष में थे. लालू ने चौधरी देवीलाल को इस पद के लिए आंतरिक चुनाव कराने के लिए पर रजामंद कराया.

कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद विपक्ष के नेता बने लालू खुद को इस पद का स्वाबाविक दावेदार मान रहे थे, आंतरिक चुनावों में भी उन्हें ही जीत मिली और लालू सीएम बने.

लालू 1990 से लेकर 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. 1990 में मुख्यमंत्री बनने के चार महीने बाद तक वह उसी चपरासी क्वार्टर में रहे थे.