लॉक डाउन में स्कूल बंद होने के बावजूद मनमानी फीस वसूलने के लिए पेरेंट्स को परेशान कर रहे स्कूल

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार में कोरोना वायरस के मरीज़ों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों का आंकड़ा तो अब 1500 को भी छू रहा है. जिसकी वजह से लॉकडाउन जारी है और आम लोगों की ज़िंदगी मानो थम सी गई है. लेकिन इसी दौरान पटना सिटी के निजी स्कूल का एक अमानवीय चेहरा भी सामने आया है.

एक तरफ़ जहां महीनों से स्कूल बंद है तो वहीं अब इस स्कूल ने अभिभावकों को अप्रैल और मई महीनों की फ़ीस के लिए परेशान करना शुरू कर दिया है. एक अभिभावक ने ये संदेश हमें भेजा है जिसमें स्कूल के सभी अभिभावकों से कोरोना काल के दौरान भी स्कूल फ़ीस मांग रहा है.

आपको ये भी बताते चलें कि कई नीजि स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू की है लेकिन वह मई के महीने से ही हुई है. जिसमें प्रतिदिन (सोमवार से शुक्रवार) एक से डेढ़ घंटों की ही नाममात्र पढ़ाई होती है.

दरअसल, इसके पीछे बिहार सरकार का भी लचर रवैया है, जिसने अभी तक ये साफ़ नहीं किया है और न ही किसी तरह का स्कूलों को कोई दिशा निर्देश दिया गया है कि उन्हें कम से कम तीन महीनों की फ़ीस माफ़ करनी चाहिए.

जबकि पड़ोसी राज्य झारखंड जहां बिहार की तुलना में कोरोना मरीज़ों की संख्या बेहद कम है, उसने सभी स्कूलों को तीन महीने की फ़ीस माफ़ करने के निर्देश दे दिए हैं. इसी तरह देश के कई और राज्यों में भी स्कूल फ़ीस पर सरकार ने फ़ीस माफ़ करने का फ़ैसला लेते हुए अभिभावकों के कंधों पर से बोझ कम किया है.

एक तरफ़ नीतीश कुमार ख़ुद को आम लोगों का हितैशी बताते हैं और दूसरी तरफ़ इस मामले पर अबतक कोई ठोस फ़ैसला न लेना उनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है.