एडवांटेज डायलॉग में मनोज मुंतशिर ने कहा – वतन और माता-पिता की इज्जत करने वालों के साथ रहता है खुदा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला गुरूवार 21 मई को एडवांटेज डायलॉग के 18वें एपिसोड की चर्चा में शामिल हुए. इस मौके पर मनोज मुंतशिर ने कहा कि जिसने अपने वतन, उसकी मिट्टी तथा अपने माता-पिता की इज्जत की, खुदा उसके साथ हमेशा रहता है. मां का प्यार अन्य के प्यार से 9 महीने बड़ा होता है. जो अपने बच्चों की हिफाजत बड़ी शिद्दत से करती है. लोगों से मुखातिब होते ही उन्होंने पहले इश्क पर बातें की. उन्होंने कहा कि बिहार के ही महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने कहा है पृथ्वी धुरी पर घूमती है और मैं कह रहा हूं कि जिन्दगी भी धुरी पर घूमती है और वह धुरी है इश्क.

अभी लॉकडाउन के दौरान वह अपनी किताब ‘मेरी फितरत है मस्ताना’ पार्ट-2 लिख रहे हैं. जिसके चंद लाइनें इस प्रकार हैं “मेरा प्यार तुम आज ठुकरा रही हो, मगर तुम मझे यूं भुला न सकोगी, मेरा जिक्र कोई अगर छेर देगा, तो आंखो का पानी छुपा न सकोगी. अभी हाथ हाथों से छुटे नहीं हैं, अभी रोक लो तो ठहर जाउंगा मैं, कहां ढ़ुंढ़ोगी फिर कहां फिर मिलुंगा, अगर वक्त बनकर गुजर जाउंगा मैं. की मेरे बिना तुम हो कितनी अकेली, बताना भी चाहो बता न सकोगी, मेरा प्यार तुम आज ठुकरा रही हो, मगर तुम मझे यूं भुला न सकोगी.

बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला

संवारोगी खुद को बड़ी कोशीशों से, मगर इश्क का क्या करोगी, ये पागल सा लड़का जहां याद आया, वहीं बेवजह रो पड़ोगी. जीसे चुमती थी हजारों दफा तुम, वह तस्वीर मेरी जला ना सकोगी, अभी सुन रहा हु जो कहना है कह दो, फिर आवाज देकर बुला ना सकोगी. मेरा प्यार तुम आज ठुकरा रही हो, मगर तुम मझे यूं भुला न सकोगी, मेरा जिक्र कोई अगर छेर देगा, तो आंखो का पानी छुपा न सकोगी. नये मौसमों की हवाएं मिलेंगी, ये माना तुम्हें जिन्दगी में, मगर बेतहाश तलाशा करोगी, मेरी खुशबूएं हर किसी में लगाती थी जैसे मुझे सीने से तुम, किसी को गले तुम लगा ना सकोगी, ये हाथों की सारी लकीड़ें जला दो, मगर खो दिया है जो वो पा ना सकोगी. मेरा प्यार तुम आज ठुकरा रही हो, मगर तुम मझे यूं भुला न सकोगी, मेरा जिक्र कोई अगर छेर देगा, तो आंखो का पानी छुपा न सकोगी.”

मीडिया एक्सपर्ट डॉ रत्ना पुरकायस्थ

मैं तुझसे प्यार नहीं करता, पर कोई ऐसी शाम नहीं जब मैं आवारा सड़कों पर तेरा इंतजार नहीं करता, मैं तुझसे प्यार नही करता, पर शहर मे जिस दिन तु न हो ये शहर पराया लगता है, हर फुल लगे बेगाना सा, हर सजर पराया लगता है, वो अलमारी कपड़ों वाली लावारीस हो जाती है, ये पहनूं या वो पहनूं ये उलझन हो जाती है, मुझे यह भी याद नहीं रहता कब दिन डुबा कब रात हुई, अभी कल की बात है घंटो तक मेरी दिवारों से बात हुई, जो होश जरा सी बाकी है लगता है खोने वाला हुं, अफवाह उड़ी है यारो में मैं पागल होने वाला हुं, मैं तुझसे प्यार नहीं करता, पर ऐसा कोई दिन है क्या जो याद तुझे तेरी बातों को सौ-सौ बार नहीं करता, मैं तुझसे प्यार नहीं करता, सच मैं तुझसे प्यार नहीं करता.

उन्होंने कहा हिन्दी-उर्दू खूबसूरत जुबान है. बिना उर्दू के हिन्दी की कल्पना नहीं की जा सकती. बिना इश्क के कविता की रचना नहीं की जा सकती. उत्तर प्रदेश के अमेठी के गौरीगंज के रहने वाले मुंतशिर ने कहा कि छोटे शहर के रहने वाले में टैलेंट अधिक होती है. 17 साल की उम्र में उन्होंने पहला मुशायरा किया जिसमें उस जमाने के बड़े-बड़े शायर आये थे. इलाहाबाद जाने के क्रम में रेलगाड़ी प्रतापगढ़ स्टेशन पर खराब हो गई. पॉकेट मं 18 रूपये थे रेलवे स्टेशन पर साहिर लुधियानवी की लिखी किताब ‘साहिर लुधियानवी की तल्खिया’ खरीदी और इलाहाबाद पहुंचने तक पूरी किताब पढ़ डाली और मन में सोचा कि मूझे अब मुम्बई चलना चाहिए क्यों कि मुझे मुम्बई जाने की योग्यता हो गयी है. उन्होंने कहा कि बिहारी मिट्टी बड़े-बड़े लोगों को तैयार कर चुकी है. मां जानकी, कौटिल्य, आर्यभट्ट जैसे इसके लाल हुए हैं. यह एक अनमैच्ड (जिसका जोड़ा नहीं) राज्य है. बिहार का शान दुनिया तक पहुंच चुका है, आपलोग खुद ही इस राज्य को और आगे बढ़ा सकते हैं.

मनोज मुंतशिर शुक्ला गुरूवार 21 मई को डिजिटल प्लेटफार्म जूम (ZOOM) पर एडवांटेज डायलॉग के मेगा शो के 18वें एपिसोड में बोल रहे थे. मीडिया एक्सपर्ट डॉ रत्ना पुरकायस्थ से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके लिखे नज्म ‘मैं फिर भी तुमको चाहूंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा इस चाहत में मर जाऊंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा मेरी जान में हर खामोशी ले तेरे प्यार के नगमे गाऊंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा इस चाहत में मर जाऊंगा मैं फिर भी तुमको चाहूंगा. को फिल्म हाफ गर्लफ्रेंड में गाना बना दिया गया जिसे कम्पोज किया था मिथुन ने जबकि इसे आवाज दी है आर्जित सिंह ने. यह नज्म उन्होंने शादी के बाद अकेले कश्मीर यात्रा के दौरान लिखे थे. इससे पहले ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है’ नज्म था जो बाद में गाना बना. ये भरे दरख्तों के पत्ते जब शाखों से गिर जाएंगे, जब झील का पानी सूखेगा और क्यारे कमल कहलाएंगे, ये वादियां जब सो जाएगी और आवाजें खो जाएंगी, मेरी जान मैं उस खामोशी में भी प्यार के नगमे गांगा, मैं फिर भी तुमको चाहुंगा, मैं फिर भी तुमको चाहूंगा.

मनोज मुंतशिर ने कहा कि कोरोना का मुश्किल दौर खत्म होगा मानव को कोरोना नहीं तोड़ सकता. आप लड़ेंगे, आप जीतेंगे. लोग कहते हैं तुम्हारे इंडिया में सुविधा नहीं है, तुम से न हो पाएगा. एक फकीर ने इंगलैंड से आकर भारत को आजादी दिला दी. 70 साल पहले सुई बनाते थे, आज रॉकेट बना रहे हैं. पैरों में कांटाचूभ जाने पर क्या लोग चलना भूल जाते हैं. हमसे तुम दोबारा नहीं कहना कि तुम से नहीं हो पायेगा. उनके कहने का तात्पर्य है कि हम कोरोना को भूलाकर फिर अपने रास्ते पर चल पड़ेंगे.

एडवांटेज ग्रुप के संस्थापक एवं सीईओ खुर्शीद अहमद

एडवांटेज ग्रुप के संस्थापक एवं सीईओ खुर्शीद अहमद ने कहा कि उन्होंने कहा कि ईद के मौके पर उर्दू की अदब और तहजीब को देखते हुए 30 और 31 मई को डिजिटल प्लेटफार्म पर होने वाला इंटरनेशनल ई मुशायरा एडवांटेज लिटरेरी फेस्टिवल का चौथा एपिसोड होगा जिसमें लखनऊ के मुनव्वर राणा, दिल्ली की शबीना अदीब, अमेरिका से फरहत शहजाद और डॉ. नौशा असरार, अबुधाबी से सैयद सरोज आसिफ, दिल्ली से शारीक कैफी, भोपाल से नुसरत मेहदी भाग लेंगी। यह कार्यक्रम भी जूम (ZOOM) पर होगा जो 7.30 बजे से 9.00 बजे तक चलेगा. इस कार्यक्रम को देखने के लिए लोगों को [email protected] पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 500 रूपए डोनेशन देना होगा यदि काई ज्यादा राशि देना चाहे तो दे सकता हैं. रजिस्ट्रेशन से प्राप्त राशि जनहित काम पर खर्च की जायेगी.

खुर्शीद अहमद ने कहा कि मुशायरा का यह कार्यक्रम काफी बड़ा है और इसमें भाग लेने के लिए अभी से रजिस्ट्रेशन कराने का सिलसिला शुरू हो गया है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए एडवांटेज लिटरेरी फेस्टिवल कोर कमेटी के सदस्य फैजान अहमद, ओबेदुर रहमान, फहीम अहमद, अहमद साद, एजाज अहमद, अनवारूल होदा, शिव चतुर्वेदी, अनवर जमाल, शोमेला, सचिव खुर्शीद अहमद तथा अध्यक्ष डॉ एए हई काफी मेहनत कर रहे हैं.