नीतीश कुमार विरोधियों से फरियाने को लाए हैं प्रशांत किशोर, अब अमित शाह भी सुनेंगे पीके की बात

जदयू की सदस्यता लेने के बाद नीतीश कुमार के साथ सीएम आवास में प्रशांत किशोर.

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : आप सबों को पता है, आज 16 सितंबर की सुबह से खबरों की दुनिया में ट्रेंड कर रहे हैं प्रशांत किशोर . हां,हां- देश के सबसे बड़े पोल स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर. चर्चा तो कई दिनों से थी, पर आज सुबह प्रशांत किशोर मतलब पीके ने ट्वीट कर कंफर्म कर दिया. बोले- बिहार से नई पारी शुरू हो रही है, एक्साइटेड हूं. कुछ ही देर में पूरी खबर आ गई. पर्दा पूरा उठ गया. अब प्रशांत किशोर सिर्फ स्ट्रैटजिस्ट नहीं रह गए हैं. पोलिटिकल पिच पर जदयू के मजबूत बैट्समैन, साथ में बॉलर बनकर सामने आ गए हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं पीके को जदयू में शामिल कराया. फिर, पार्टी की मीटिंग में मेगा इंट्री कराई. तुरंत में ही प्रशांत किशोर की पोलिटिकल इंट्री और नीतीश कुमार की नई चाल की गूंज पटना से लेकर दिल्ली तक होने लगी. प्रशांत किशोर, सचमुच में ऐसे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी प्रेजिडेंट अमित शाह भी बिना खोज-खबर लिए शांत नहीं बैठ सकते. नीतीश कुमार ने क्या प्लान कर प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करा लिया, यह भी सभी जानने को बेचैन-परेशान हैं. दरअसल, नीतीश कुमार के बारे में सबों को पता है कि उनके फैसले का पूर्वानुमान बहुत ही मुश्किल होता है.

हां, एक बात सच है कि वायरल बुखार के कारण आराम लेने जाने वाले नीतीश कुमार जब कभी वापसी करते हैं, तो बिहार की राजनीति को हिलाने वाला कोई न कोई फैसला हो ही जाता है. अभी पिछले दिनों कई दिनों तक नीतीश कुमार बीमार ही थे. अब ठीक होकर आए, तो देखिए प्रशांत किशोर को साथ लेकर आ गए हैं. राजनीति में आने और जदयू में शामिल हो जाने वाले प्रशांत किशोर क्या-क्या कर देंगे, समझिए 10 पॉइंट्स में…

1 . सुबह जैसे ही खबर आई कि प्रशांत किशोर जदयू में शामिल हो रहे हैं और सीधे पॉलिटिक्स करेंगे, लोगों ने सबसे पहले बक्सर के सांसद और केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की नींद हराम कर दी. प्रशांत बक्सर के ही रहने वाले हैं. कहा जाने लगा कि प्रशांत किशोर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन, कुछ ही देर बाद बातें क्लियर हो गई. प्रशांत अभी खुद चुनाव लड़ने को नहीं आये हैं, जदयू को बहुत आगे ले जाना है.

2 . प्रशांत किशोर के आने का तुरंत-तुरंत वाला असर यह दिखा कि जदयू और नीतीश कुमार को लेकर बीजेपी कंफ्यूज्ड हो गई. मंत्रणा दिल्ली तक शुरू हो गई. दरअसल, प्रशांत किशोर, ऐसे शख्स हैं, जो टीम अमित शाह के जोड़-तोड़ वाले हर दांव को जानते हैं.

3 . नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को लाकर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जदयू की पोल स्ट्रेटजी अपनी होगी. मतलब, 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए जदयू बीजेपी की पोल स्ट्रेटजी से डिक्टेट नहीं होगी. यह बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है.

प्रशांत किशोर व ​अश्विनी चौबे

4 . अब सीट शेयरिंग के लिए जदयू ठोस फार्मूला निकालेगा. प्रशांत किशोर की बात सभी सुनेंगे. एनडीए की बैठक में, चाहे अमित शाह ही मौजूद क्यों न हों, जदयू की ओर से प्रशांत किशोर शिरकत करेंगे. याद रखिएगा, 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में मोदी को हराने आये प्रशांत किशोर ने ही महागठबंधन में राजद-जदयू को 101-101 सीट और कांग्रेस को 41 सीटों का फार्मूला निकाला था.

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5 . प्रशांत किशोर की असली जादूगरी राजस्थान-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ चुनाव के नतीजों के बाद दिखेगी. दो प्रदेशों में यदि भाजपा हार गई, तो 2019 के लिए गठबंधन दलों की जरूरत बहुत अधिक बढ़ जाएगी. यदि बीजेपी तीनों स्टेट जीत गई, तो गठबंधन दलों को औकात में रखना चाहेगी. लेकिन, याद रखिए, इन दोनों सूरतों में प्रशांत किशोर का अपना प्लान जदयू की मजबूती के लिए होगा.

6. और प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी खूबी यह जानिए कि वे एक कॉल पर कांग्रेस के राहुल गांधी से भी मिल सकते हैं. लालू यादव का लव आज भी प्रशांत किशोर को मिलता है. सो, ऐसे में याद रखिएगा, अब बीजेपी बहुत प्रेशर में जदयू को नहीं रख सकती. नया पोलिटिकल गेम प्रशांत किशोर कभी भी बजा दे सकते हैं.

7. हवा बनाने और दूसरे की हवा खराब करने में मास्टरी है प्रशांत किशोर की. इसलिए, बिहार में बहुत कुछ दिखने वाला है. जदयू के प्रवक्ता अब कुछ भी बोल देने की स्थिति में नहीं होंगे. प्रशांत किशोर जरूर निर्देशित करेंगे.

प्रशांत किशोर को जदयू की सदस्यता दिलाते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

8. बिहार विधानसभा के चुनाव के समय प्रशांत किशोर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बंगले पर ही रहते थे. अब उनका आशियाना कहां बनाया जाता है, देखना होगा. फिर से नीतीश कुमार के ही साथ बंगले में रहे, तो असर अधिक दिखेगा.

9. प्रशांत किशोर माइक्रो मैनेजमेंट के एक्सपर्ट हैं. वे देखेंगे कि पार्टी के संगठन की क्या स्थिति है. फिर यह भी कि पब्लिक में नीतीश कुमार ने जिन कार्यक्रमों की शुरुआत की है, उनकी सूरत क्या है. शराबबंदी और लॉ एंड आॅर्डर नीतीश कुमार की यूएसपी है. इसे ठीक रखने को प्रशांत किशोर हर जरूरी राय देंगे.

10. आज की पोलिटिकल लड़ाई का सबसे बड़ा टूल सोशल मीडिया है. प्रशांत किशोर फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर छा जाने की रणनीति तैयार करेंगे. आक्रामक तेवर दिखेगा. तैयार रहिए, टिकट के दावेदारों से पूछा जा सकता है, सोशल मीडिया पर आप कितने पॉपुलर हैं और आपके पेज को कितने लोग लाइक करते हैं. 

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