अंतर्राष्ट्रीय काव्य मंच पर गूंजे बिहार के लोकगीत, नीतू नवगीत ने श्रोताओं को सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया

पटना: बिहार के लोकगीतों में समाहित माटी की खुशबू से अंतर्राष्ट्रीय काव्य मंच सुवासित हुआ. प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने अनेक पारंपरिक लोक गीतों की प्रस्तुति कर काव्य मंच के श्रोताओं को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि लोकगीतों में मां का प्यार और दादी का दुलार छुपा होता है. लोकगीत हमारी विरासत का हिस्सा हैं. इन लोकगीतों में हमारे पुरखों की आत्मा भी बसती है और हमारी पहचान भी.

कार्यक्रम में उन्होंने प्रथम पूज्य देव ह तू गौरी के ललनवा और लाली चुनरिया शोभे हो शोभे लाली टिकुलिया जैसे भक्ति गीतों के साथ सधी हुई शुरुआत की. फिर सेजिया पर लोटे काला नाग हो कचौड़ी गली सून कइला बलमू, रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, तुम को आने में, तुम को बुलाने में कई सावन बरस गए साजना, कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला जैसे मनभावन गीत पेश किए.



उन्होंने केलवा के पात पर उगेलेन सुरुज देव झांके झुंके गाकर कार्यक्रम में छठ की छटा बिखेरी. महिला सशक्तिकरण और दहेज विरोधी गीतों को भी उन्होंने पेश किया. या रब हमारे देश में बिटिया का मान हो और पढ़ लिख के लेहब जिंदगी संवार बाबा सहब हम ना दहेजवा के मार बाबा गाकर उन्होंने नारी मन की भावनाओं को प्रकट किया. हिंदी पखवारा के अवसर पर उन्होंने कमलेश द्विवेदी रचित गीत किया जिन्होंने जीवन अर्पित हिंदी के उत्थान में श्रद्धा से नतमस्तक मेरा उन सब के सम्मान में गाया. उन्होंने प्रसिद्ध गीतकार डॉ कुंवर बेचैन की प्रसिद्ध रचना बदरी बाबुल के अंगना जइयो . . . जइयो बरसियो कहियो कि हम हैं तोरी बिटिया की अंखियां गाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया.

कार्यक्रम में सुजीत कुमार ने हारमोनियम पर और राजन कुमार ने तबले पर संगत किया. कार्यक्रम का संयोजन अंतर्राष्ट्रीय काव्य मंच के विवेक सावर्णय और डॉ मानसी द्विवेदी ने किया. डॉ मानसी द्विवेदी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय काव्य मंच के कार्यक्रम भारत के अलावा तंजानिया,केन्या, नाइजीरिया, जर्मनी और ब्रिटेन सहित कई देशों में देखे गए.