मुजफ्फरपुर के बाढ़ पीड़ितों का दर्द, रात के अंधेरे में लगता है डर, जैसे-तैसे जीने को हैं मजबूर

लाइव सिटीज, मुजफ्फरपुर/अभिषेक : उत्तर बिहार कई जिलों में बाढ़ और बारिश ने लोगों के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. कई जिलों के सैकड़ौं गांवों को तबाह कर दिया है. इसमें से ही एक जिला मुजफ्फरपुर है, जहां बागमती, बूढ़ी गंडक और लखनदेई ने कई गांवों को तबाह कर दिया. यहां के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.

सरकार दावे कर रही है कि बाढ़ पीड़ितों की मदद का हर संभव प्रयास किया गया है. लेकिन इसकी पड़ताल करने पर अलग ही बात सामने आई. जो कहा जा रहा है उसकी जमीनी हकीकत क्या है इसे जानने की कोशिश की तो पता चला कि सरकारी दावे तो छोड़िए सरकारी अफसर तक बाढ़ पीड़ितों के बीच नहीं पहुंच पा रहे हैं.



यही हकीकत है मुजफ्फरपुर जिले के औराई के बभनगामा गांव की जहां लोग पिछले 15 दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, लेकिन अभी तक ना कोई अधिकारी और ना ही कोई सरकारी मदद उन तक पहुंच पाई है. लोग जैसे तैसे जीने को मजबूर हैं. लोग इस आशा में हैं कि कब उन्हें सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी.

लोगों का कहना है कि अभी तक उन्हें पॉलीथिन शीट भी उपलब्ध नहीं कराई गई है. लोग बारिश में भी जैसे तैसे जीने को मजबूर हैं. कोई सुनने और देखने वाला नहीं है. महिलाओं ने बताया कि रात के अंधेरे में काफी डर लगता है. रात में डर लगता है कि कहीं सांप ना आ जाए. सभी के छोटे-छोटे बच्चे हैं उनकी फिक्र रहती है.