बिहार के मरीजों के लिए खुशखबरी, मामूली खर्च पर पारस में होगा किडनी ट्रांसप्लांट…

लाइव सिटीज डेस्क : किडनी के मरीजों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी. अब इसके ​इलाज या ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना होगा. किडनी ट्रांसप्लांट अब पटना में होने लगा है. यह पटना के राजा बाजार स्थित पारस अस्पताल में शुरू हो गया है. इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा. मंगलवार को इसकी जानकारी पारस अस्पताल के डायरेक्टर डॉ एए हई ने दी. पटना के होटल पनास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ हई ने कहा कि बिहार के साथ ही यह पारस अस्पताल के लिए भी ऐतिहासिक दिन है.

बता दें कि दुनिया भर में लाखों लोग किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं. उन्हें या तो दूसरी किडनी की जरूरत पड़ती है या फिर आए दिन अस्पताल जाकर डायलिसिस मशीन का सहारा लेना पड़ता है. डायलिसिस में काफी समय लगता है और पैसा भी. एक बार डायलिसिस शुरू हो गया तो फिर जिंदगी भर इसी के सहारे जान बची रहती है. डायलिसिस बंद तो सांस बंद. भारत में भी हर साल 2.5 लाख लोग किडनी की बीमारी से मरते हैं. बीमारी के आखिरी चरण में पहुंचने के बाद डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट का ही विकल्प बचता है. वहीं इसमें बहुत ही ज्यादा पैसे खर्च होते हैं. लेकिन पटना के पारस अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांटेशन के शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत ​मिली है.

बिहार में हेल्थ केयर में हमेशा से ही टॉप पर रहने वाले पटना के राजा बाजार स्थित पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सोमवार को पहली बार दो लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. इस किडनी ट्रांसप्लांट की खास बात यह रही कि डोनरों की किडनी पारंपरिक तरीके से हटकर लौप्रोस्कोपिक विधि से निकाली गई. ये ट्रांसप्लांट प्रक्रिया किडनी के जाने माने डॉ महेश देसाई ने की. डॉ देसाई के ट्रांसप्लाट टीम में डॉ. अरविंद प्रकाश हणपुले, डॉ. मोहम एम राजकपुरकर, डॉ. दीपक मिस्त्री, और डॉ. उमापति एन हेगड़े शामिल थे.

वहीं पारस एचएमआरआई की तरफ से इंस्टीच्यूट ऑफ यूरोलोजी, नेफ्रोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ अजय कुमार, डॉ प्राभात रंजन, डॉ अपूर्वा के चौधरी, डॉ विकास कुमार, डॉ शशि कुमार और डॉ ऋषि किशोर भी ट्रांसप्लाट ऑपरेशन में शामिल थे. पारस ने बहुत ही मामूली खर्च पर अपनी सामाजिक जवाबदेही को निभाते हुए मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट किया है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ एए हई ने कहा कि ये बहुत ही अच्छा कदम है. पहले जहां किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को ट्रांसप्लाट के लिए वेल्लोर या गुजरात जाना पड़ता था. अब उन्हें यह सुविधा बिहार में ही मिलेगी. बिहार के लोगों को अब किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पारस अस्पताल में ही उनका किडनी ट्रासंप्लांट अब अत्याधुनिक तरीके से हो जाएगा.

मौके पर पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ तलत हलीम औऱ योरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी तथा ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ अजय कुमार ने कहा कि सोमवार का दिन पारस के लिए ऐतिहासिक था. यह गर्व की बात है कि बिहार के लोगों को अब किडनी ट्रासंप्लांट के लिए स्टेट से बाहर नहीं जाना पड़ेगा.


वहीं डॉ हलीम ने कहा कि पारस बिहारवासियों को किडनी ट्रांसप्लांट का इलाज कम से कम खर्च पर उपल्बध कराने वाला पहला ह़ॉस्पिटल है. हमारे यहां लगभग सरकारी दर के बराबर खर्च मरीजों को वहन करना होगा. पारस हेल्थ केयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ धर्मिन्दर नागर ने भी मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित किया. सबसे पहले तो उन्होंने पारस एचएमआरआई के सभी डॉक्टर्स को बधाई दी और कहा कि यह हॉस्पिटल के डॉक्टरों के लगातार प्रयास का नतीजा है.

पारस हॉस्पिटल हमेशा से ही हेल्थ केयर में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जाना जाता है. उसका हमेशा से यह प्रयास रहा है कि वह बिहार के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करे, ताकि उन्हें इसक लिए कहीं भटकना न पड़े. प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. अजय कुमार, डॉ शाइबल गुप्ता, डॉ महेश देसाई, डॉ दीपक मिस्त्री, मोहन एम राजापुरकर आदि भी मौजूद थे.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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