नई दिल्ली/पटना. देश में आयुष्मान भारत योजना के लांच के बाद से गैर—संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित लोगों की ओर से जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने को लेकर  मांग बढ़ रही है. इसे देखते हुए निजी क्षेत्र की फर्मों को अब सरकार जिला स्तर पर साथ लेकर चलने की योजना बना चुकी है.  NITI आयोग ने बुधवार (17 अक्टूबर) को दिशानिर्देशों और विशेष सुविधा मॉडल समझौते का अनावरण किया है जो प्राइवेट प्लेयर्स को जिला अस्पतालों (जिन्हें अभी फिलहाल सरकार संचालित करती है) में प्रवेश की सुविधा देगा.

पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी बोली-प्रक्रिया के आधार पर होगा चुनाव

जानकारी के अनुसार NITI आयोग ने दिशानिर्देश देते हुए कहा कि निजी प्लेयर्स को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी बोली-प्रक्रिया के आधार पर इसके लिए चुना जाएगा. साथ हीं इसमें कहा गया है कि राज्य सरकारें अपनी सुविधा के अनुसार इन दिशानिर्देशों के अनुकूल काम कर सकेंगी. NITI आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इस बारे कहा कि इसका मकसद जिला स्तर पर विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा  को गरीबों तक पहुंचाना है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्य को करने के लिए दिशानिर्देशों में एक पे-पर-यूज मॉडल का सुझाव दिया है. इसके तहत राज्य सरकार जिला अस्पतालों में प्राईवेट प्लेयरों को जगह देगी. जिसके बदले प्राइवेट प्लेयर बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और गैर-संक्रमणीय बीमारियों के इलाज के लिए उपकरणों के साथ मेन पावर की व्यवस्था करेंगे.

क्या होती हैं गैर-संक्रमणीय बीमारियां

आपको बता दे कि गैर-संक्रमणीय, या पुरानी, बीमारियां लंबी अवधि की बीमारियां हैं जो आम तौर पर धीरे धीरे होती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन बीमारियों को चार मुख्य प्रकारों में बांटा है. इसमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (जैसे हर्ट अटैक और स्ट्रोक), कैंसर, पुराने सांस रोग (जैसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा) और डायबिटीज आते हैं.

प्रोसिजर और सर्विस के पैकेज के मुताबिक मिलेगा फीस

इन प्राइवेट प्लेयर्स की फीस को प्रोसिजर और सर्विस पैकेज के मुताबिक तय करेगी. यह काम बोली के समय सिलेक्शन करते समय ही कर लिया जाएगा. यह लाभार्थी की तरफ से निजी पार्टनर को रिम्बर्स किया जाएगा. आपको बता दे कि आयुष्मान भारत के तहत यह समझौता 15 साल के लिए किया जाएगा. इसमें दरों की प्रतिबद्धता के साथ रिन्यूअल का ऑप्शन भी होगा.

गरीबों को मिलेगा सस्ता इलाज

दिशानिर्देशों पर गौर करें तो जिला स्तर पर पीपीपी मॉडल को अपनाने से जिला स्तर पर गरीबों तबको को बेहतर इलाज मिलने में सुविधा होगी. वहीं इन परिवारो के जेब पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. राज्यों में प्रबंधन अनुबंध मॉडल का चयन, सेवाओं के मॉडल की खरीद, निर्माण, संचालन और मॉडल या सह-स्थान मॉडल को बीओटी अप्रोच के साथ स्थानांतरित करने का विकल्प होगा. BOT के तहत सरकार किसी प्राइवेट कंपनी को कोई काम करने का ठेका देती है और फिर काम पूरा होने पर इसे सभी अधिकारों के साथ वापस ले लेती है. इसे बीओटी कहते हैं.