बिहार भारती सम्मान समारोह के साथ खत्म हुआ पटना पुस्तक मेला, लास्ट डे भी उमड़े बुक लवर्स

लाइव सिटीज डेस्क : पटना पुस्तक मेले के आखिरी दिन भी लोगों की जबर्दस्त भीड़ जुटी. गांधी मैदान में लगे इस पुस्तक मेले का सोमवार को इसका समापन हो गया. 10 दिनों तक चलने वाले 24वें पटना पुस्तक मेले में शुरुआत से ही बुक लवर्स की जबर्दस्त भीड़ रही. इस मेले का आयोजन नॉवेलटी प्रकाशन ने बिहार सरकार ने साथ मिलकर किया था. इस बार का थीम ‘लड़की को सामर्थ्य दो, दुनिया बदलेगी’ था.

 



2 दिसंबर से शुरू हुए इस मेले में डेली कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. आज आखिरी दिन बिहार भारती सम्मान समारोह का कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें विभिन्न क्षेत्र के लोगों को सम्मानित किया गया. बिहार भारती सम्मान के तहत अलग-अलग क्षेत्रों से चार लोगों को विद्यापति पुरस्कार, यक्षिणी पुरस्कार, भिखारी ठाकुर पुरस्कार और सुरेंद्र प्रताप सिंह स्मृति पुरस्कार दिया गया.


इन्हें मिला विद्यापति पुरस्कार

विद्यापति पुरस्कार पटना की रहनेवाली अनुभुति को मिला, जो कवयित्री हैं. अनुभूति 15 वर्षों से ही साहित्य सेवा में लगी हुई हैं. इतना ही नहीं, 16 वर्ष की आयु में इन्होंने अपनी 57 कविताओं को संकलित करके पहली किताब ‘प्रेमराग’ की रचना की. अनुभूति को साहित्य के अलावा संगीत, योग, दर्शनशास्त्र एवं मनोविज्ञान में गहरी अभिरुचि है. इसके साथ ही ‘प्रेम’ इनका सबसे प्रिय विषय है. लेखन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान और बिहार की पहचान सशक्त करने के लिए इन्हें विद्यापति पुरस्कार से नवाजा गया. इस पुरस्कार के निर्णायक दल में डॉ. ओम निश्चल, डॉ. मीरा श्रीवास्तव और डॉ. भावना शेखर थे.

इन्हें मिला यक्षिणी पुरस्कार

मुरारी झा ने बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से गोल्ड मेडल के साथ एमए की डिग्री ली है. साथ ही पेटिंग के साथ कई नए प्रयोग किए हैं. इससे इन्हें काफी कम उम्र में ही वैश्विक पहचान मिली. पेंटिग के द्वारा विशिष्ट योगदान और कला के क्षेत्र में बिहार की खास पहचान बनाने के लिए इन्हें यक्षिणी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यक्षिणी पुरस्कार के निर्णायक समिति में उमेश शर्मा, रजनीश राज और अमरेश कुमार शामिल थे.

इन्हें मिला सुरेंद्र प्रताप सिंह स्मृति पुरस्कार

पत्रकारिता जगत में अपने विशेष कार्यों के लिए चारुस्मिता को सुरेंद्र प्रताप सिंह स्मृति पुरस्कार दिया गया. चारुस्मिता पटना में ही पत्रकार हैं. इन्हें साहित्यिक पत्रकारिता में खास रुचि है. साथ ही कला, संस्कृति पर्यावरण, विरासत संरक्षण समेत कई विषयों पर इन्हें रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता हासिल है. साथ ही शास्त्रीय संगीत में भी इन्हें गहरी रुचि है. पुरस्कार निर्णायक दल में बिहार के फेमस क्राइम जर्नलिस्ट ज्ञानेश्वर वात्स्यायन, तस्लीम खान और दीनानाथ सहनी शामिल थे.

इन्हेंं मिला भिखारी ठाकुर पुरस्कार

यह पुरस्कार दूरदर्शन द्वारा निर्मित टेलीफिल्म ‘मृगतृष्णा’ और ‘प्रेम का प्रतिदिन’ से अपनी पहचान बनाने वाले कुमार रविकांत को मिला. इनका जन्म नालंदा के मुबारक पुर गांव में हुआ था. कुमार रविकांत को निर्देशन और अभिनय के साथ तकनीकी क्षेत्र में भी रंगमंच पर अपना अहम योगदान दिया. इनकी एक हिंदी फिल्म ‘द जिक्स’ भी रिलीज होने वाली है, जिसमें यह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही यह पहले भी मैथिली फिल्म ‘ललका गुलाब’ में काम कर चुके हैं. रंगमंच के क्षेत्र में इनके योगदान के लिए इन्हें भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित किया गया. इस पुरस्कार के निर्णायक दल में अभय सिन्हा, नीलेश मिश्रा और प्रवीण कुमार गुंजन थे.