BSEB की MTS बहाली में ठगी, दो सहायक और एक प्रशाखा पदाधिकारी से पूछताछ जारी

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प्रतीकात्मक फोटो

पटना : बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) एक बार फिर से चर्चा में है. इस बार मामला रिजल्ट में सेटिंग या पास—फेल का नहीं है. बल्कि मामला ठगी का है. वो नौकरी लगाने के नाम पर. ठगी के इस मामले की जांच पटना पुलिस ने शुरू कर दी है. जांच करने के लिए डीएसपी लॉ एंड आॅर्डर ड़ा. मो. शिब्ली नोमानी और कोतवाली के थानेदार अपनी टीम के साथ बोर्ड आॅफिस पहुंचे थे.

शुरूआती जांच के आधार पर पुलिस ने बोर्ड के तीन स्टाफ को अपने कब्जे में लिया. जिनमें असिस्टेंट दीपक कुमार वर्मा, चंदन और प्रशाखा पदाधिकारी राम सकल शामिल हैं. इन तीनों को कोतवाली थाना ले जाया गया. जहां डिटेन कर उनसे अभी पूछताछ चल रही है. कंप्लेन में बोर्ड आॅफिस में काम करने वाले इन तीनों स्टाफ का नाम सामने आया था.



इसके साथ ही एक न्यूज चैनल की टीम ने भी इस मामले में स्टिंग आॅपरेशन की थी. जिसके बाद ठगी की काफी सारी सच्चाई सामने आई. न्यूज चैनल का स्टिंग सामने आने के बाद पटना पुलिस टीम ने कार्रवाई करने में देरी नहीं की.

ये है पूरा मामला

पटना के ही रहने वाले राजेश गुंजन ने कांट्रैक्ट पर कंप्यूटर आॅपरेटर के पोस्ट के लिए एमटीएस का फॉर्म भरा था. हाल में ही इसका एग्जाम भी हुआ था. इस एग्जाम को बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने ही कंडक्ट करवाया था. रिटेन एग्जाम को राजेश गुंजन पास कर चुका था. इसके बाद वो टाइपिंग स्पीड टेस्ट में भी क्वालीफाई कर चुका था.

अचानक 5 दिसंबर की सुबह 8 बजकर 42 मिनट पर इसके मोबाइल पर एक कॉल आया. कॉलर ने इसे खुद को बोर्ड आॅफिस का स्टाफ बताते हुए अपना नाम दीपक वर्मा बताया. कॉलर ने कंप्यूटर आॅपरेटर का पोस्ट की नौकरी पाने के लिए गुंजन से 80 हजार रुपए देने की डिमांड की. उसे अपने बैंक अकाउंट का नंबर भी दिया. इस पूरे बातचीत को गुंजन ने रिकॉर्ड कर लिया था.

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मामला एसएसपी मनु महाराज तक पहुंचा. गुंजन की कंप्लेन को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने डीएसपी लॉ एंड आॅर्डर को पूरे मामले की जांच कर ठोस कार्रवाई करने का आदेश दिया था. अब पुलिस की प्रोपर जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि डिटेन किए गए बोर्ड के तीनों स्टाफ ठगी के इस मामले में शामिल हैं या नहीं? कहीं शातिरों का कोई गैंग बोर्ड स्टाफ के नाम पर ठगी तो नहीं कर रहा है?