एक बार फिर मिला ‘नालंदा कनेक्शन’, पुलिस के रडार पर BSEB का काम देख रही प्राइवेट एजेंसी

पटना : जिस वक्त बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के तहत इंटरमीडिएट और मैट्रिक एग्जाम की कॉपियां चेक की जा रही थी, उसी दौरान नंबर बढ़ाने का खेल चल रहा था. स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के मोबाइल पर कॉल कर नंबर बढ़ाने के नाम पर रुपयों की ठगी की जा रही थी. इसके बाद बीएसईबी ने टीईटी का एग्जाम कंडक्ट कराया. उसमें भी इंटरमीडिएट और मैट्रिक एग्जाम के बाद वाला हाल ही देखने को मिला था. इन मामलों में एफआईआर दर्ज कर पटना पुलिस ने जांच की थी. उस वक्त मामले का कनेक्शन नालंदा, शेखपुरा और लखीसराय जिले से जुड़ा था.

अब ताजा मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने का है. ठगी के इस मामले का कनेक्शन भी नालंदा जिले से जुड़ गया है. पुलिस की जांच में इस बात के ठोस सबूत मिले हैं. दरअसल, बीएसईबी ने ही एमटीएस का एग्जाम कंडक्ट कराया था. एग्जाम को पास करने वाले पटना के ही राजेश गुंजन ने टाइपिंग स्पीड टेस्ट को भी क्वालीफाई कर लिया था. अब उससे 5 दिसंबर को कॉल कर बीएसईबी में कंप्यूटर आॅपरेटर की नौकरी के नाम पर 80 हजार रुपए की डिमांड की गई थी. इस मामले में बोर्ड के तीन स्टाफ को डिटेन कर पुलिस ने पूछताछ भी की. लेकिन कोई रिजल्ट नहीं मिलने पर तीनों को छोड़ दिया गया.



इस तरह जुड़ा नालंदा से तार

राजेश गुंजन को जिस मोबाइल नंबर से कॉल किया गया था. उसके डिटेल्स को पटना पुलिस की टीम ने खंगाला. शनिवार को इसका डिटेल भी पुलिस के हाथ में आ गया. जिस नाम और एड्रेस पर सिम कार्ड खरीदा गया था, वो नालंदा जिले का मिला है. इसी तरह से जिस बैंक अकाउंट नंबर में रुपए डालने के लिए राजेश को कहा गया था, जांच में वो भी नालंदा जिले का ही मिला.

इस बात की पुष्टि मामले की जांच कर रहे डीएसपी लॉ एंड आॅर्डर डा. मो. शिब्ली नोमानी ने की है. ठगी के मामले में फिर से नालंदा जिले का कनेक्शन सामने आने से अब पटना पुलिस भी हैरत में पड़ गई है.

आखिर कहां से मिल रहा है स्टूडेंट्स और कैंडिडेट्स का डाटा

ठगी के पुराने मामलों की जांच करते हुए पटना पुलिस ने शुरूआती जांच और कार्रवाई तो अच्छे से की थी. लेकिन इसके बाद लापरवाही भी बरती. पुराने मामलों की जांच कर रही टीम इस बात की तह तक कभी नहीं पहुंची कि आखिर शातिरों के गैंग को स्टूडेंट्स का डाटा कहां से मिला था? अगर इस सवाल का जवाब उसी दौरान पुलिस टीम ने ढूंढ़ लिया होता तो शायद आज कंप्यूटर आॅपरेटर की नौकरी के नाम पर ठगी का मामला सामने नहीं आता. लेकिन सवाल अब भी वहीं बना है कि आखिर शातिर ठगों के गैंग के पास एमटीएस का एग्जाम क्वालीफाई करने वाले कैंडिडेट्स का डाटा कहां से आया?

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रडार पर प्राइवेट एजेंसी, हो सकती है पूछताछ

इस पूरे मामले की पुलिस इन्वेस्टीगेशन में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. आॅनलाईन रजिस्ट्रेशन, फॉर्म भरने और रिजल्ट जारी करवाने का काम बीएसईबी ने एक प्राइवेट एजेंसी को दे रखा है. सोर्स की मानें तो इंटरमीडिएट और मैट्रिक से जुड़े कामों को ‘न्यासा’ नाम की प्राइवेट एजेंसी ने देखा था. जबकि एमटीएस का काम दूसरी कंपनी को दिया गया था. अब संभावना इस बात की जग गई है कि कहीं न कहीं शातिरों के गैंग से इन प्राइवेट एजेंसियों का कोई कनेक्शन हो. क्योंकि पुलिस की जांच में ये बात सामने आई है कि प्राइवेट एजेंसी न्यासा का कनेक्शन नालंदा जिले से है. अब प्राइवेट एजेंसी पटना पुलिस के रडार पर है.

एजेंसी के लोगों से जल्द ही पुलिस टीम पूछताछ कर सकती है. हालांकि शक के दायरे में बीएसईबी के आईटी सेल में काम करने वाले स्टाफ भी हैं. सोर्स की मानें तो मामले की जांच करने के लिए पटना पुलिस की एक टीम नालंदा में है.