जनसंख्या वृद्धि की रफ़्तार में पीछे नहीं है पटना, 58 से बढ़कर 76 लाख हुई आबादी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार जनसंख्या के मामले में बहुत जल्द महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनने के कगार पर है. तो वहीं, पटना जिला भी रफ़्तार के मामले में कम नहीं है. जनसंख्या को लेकर पटना जिले ने भी खूब तरक्की की है. पिछले आठ वर्षों में 18 लाख से भी अधिक की आबादी बढ़ी है. सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि शहरी क्षेत्र में हो रहा है.

जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 2011 में पटना जिले की जनसंख्या 58 लाख 38 हजार 465 थी जो पहली जनवरी 2019 में बढकर 76 लाख 74 हजार 310 हो गई है. यानि आठ वर्षों में पटना की जनसंख्या 18 लाख 35 हजार 845 बढी है.

महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जनसंख्या में आठ गुना बढोतरी

2011 में पुरुषों की संख्या 30 लाख 78 हजार 512 थी जो 2019 में बढ़कर 39 लाख दो हजार 704 हो गई है. इसी प्रकार महिलाओं की संख्या 2011 में 27 लाख 59 हजार 953 थी, जो बढ़कर 37 लाख 71 हजार 606 हो गई है. महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जनसंख्या में आठ गुना बढोतरी हुई है.

महारष्ट्र को पछाड़ देगा बिहार

बिहार जनसंख्या के मामले में बहुत जल्द महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनने के कगार पर है. एक आकलन के अनुसार 2041 तक बिहार की आबादी में सबसे ज्यादा 24.7 फीसदी की वृद्धि होगा.  तब बिहार महाराष्ट्र को पीछे छोड़ आबादी के लिहाज से देश का दूसरा बड़ा राज्य बन जाएगा. जबकि अभी उसका नंबर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा है. जिन राज्यों में शिक्षा सुधर रही है और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो रही हैं वहां आबादी घट रही है, लेकिन पिछड़े राज्यों की स्थिति में अगले 20 सालों के बाद भी ज्यादा सुधार होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. इसका एक बड़ा उदाहरण बिहार है.

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पिछले दिनों संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों में चौंकाने वाली तस्वीर नजर आ रही है. जिन राज्यों में  जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए अच्छा कार्य किये जा रहे हैं उन राज्यों में आबादी तेजी से घट रही है. लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. जबकि आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र और यहां तक कि पश्चिम बंगाल की आबादी की रफ्तार धीमी हो जाएगी.

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