सड़क पर बेहोश पड़े मिले पूर्व DGP अभ्यानंद के गुरु, ट्रैफिक एसपी ने इलाज करा बचाई जान

लाइव सिटीज, पटना : जिस प्रोफेसर के पढ़ाए हुए स्टूडेंट सरकारी नौ​करियों में बड़े—बड़े पोस्ट पर रह हों, आज वही प्रोफेसर एनके मिश्रा पटना की सड़क पर बेहोशी की हालत में मिले. एनके मिश्रा पटना सायंस कॉलेज में जिओलॉजी के प्रोफेसर रह चुके हैं. रिटार्यमेंट के बाद ये नागेश्वर कॉलोनी में स्थित अपने घर में ही र​हते हैं. लेकिन गुरुवार की दोपहर वो वोल्टास मोड़ के पास सड़क पर काफी देर तक वो बेहोश पड़े रहे. उस दरम्यान न जानें कितने लोग उसी जगह से होकर पैदल गुजरे. कितने टू व्हीलर और फोर व्हीलर गाड़ियों पर सवार लोग भी गुजरे. नजरे सबकी पड़ी. लेकिन किसी ने भी उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाना तो दूर ये देखना भी मुनासिब नहीं समझा कि रोड पर बेहोश पड़ा इंसान किस हालत में है? उनकी सांसे चल भी रही हैं या नहीं?

किसी ने एंबुलेंस को कॉल करना तो दूर पास के कोतवाली थाना की पुलिस को भी सहायता के लिए कॉल नहीं किया. आपको बता दें कि पूर्व आईपीएस आॅफिसर और बिहार के डीजीपी रहे अभ्यानंद रिटायर्ड प्रोफेसर एनके मिश्रा के स्टूडेंट रह चुके हैं.

ट्रैफिक एसपी ने किया मिसाल कायम

यहां पर तारीफ करनी होगी पटना के ट्रैफिक एसपी प्राणतोष कुमार दास की. जी हां, आपको जानकर भले ही आश्चर्य हो रहा होगा. लेकिन ये सच्चाई है. बात तकरीबन दोपहर के 12 बजकर 45 मिनट की होगी. ट्रैफिक एसपी प्राणतोष कुमार दास डाक बंगला चौराहा से होते हुए कहीं जा रहे थे.

उन्हें एक जरूरी मीटिंग में शामिल होना था. इनकी सरकारी गाड़ी काफी तेजी से जा रही थी. बावजूद इसके ट्रैफिक एसपी की नजर सड़क पर बेहोश पड़े रिटायर्ड प्रोफेसर पर पड़ी. बेहोश पड़े इंसान को पहले से न तो वो जानते थे और न ही पहचानते थे. बावजूद इसके उन्होंने ड्रावइर को गाड़ी रोकने को कहा. उनकी हालत देखी और बॉडीगार्ड को बोल अपनी गाड़ी में बैठाया. फिर चंद मिनटों में गार्डिनर रोड हॉस्पिटल पहुंचे.

 

मीटिंग की चिंता छोड़ ट्रैफिक एसपी इलाज कराने में जुट गए. हॉ​स्पिटल में खड़े रहकर अपनी मौजूदगी में पूरा इलाज कराया. 85 साल के रिटायर्ड प्रोफेसर की हालत में जब सुधार हुआ तब उनसे बातचीत हुई. इसी बातचीत में रिटायर्ड प्रोफेसर ने अपना परिचय बताया. घर में कोई नहीं था. रुपए निकालने के लिए वो बैंक आए थे. लेकिन किसी बाइक वाले ने उन्हें टक्कर मार दिया था. जिसके बाद वो गिर पड़़े और बेहोश हो गए. इसके बाद उन्हें कुछ भी याद नहीं था.

इलाज कराने के बाद ट्रैफिक एसपी ने रिटायर्ड प्रोफेसर को उनके घर पहुंचाया. इसके बाद वो अपने काम पर निकले. इस पूरे मामले में ट्रैफिक एसपी ने एक ही बात कही कि छोटे—छोटे काम को करने से ही इंसान बड़ा बनता है न कि बड़ी—बड़ी बात करने से.