मटुकनाथ ने रिटायर होते फेसबुक पर लिखा – मैं 65 साल का लरिका, सबसे पहले ब्याह करेंगे

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प्रोफ़ेसर मटुकनाथ (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पटना यूनिवर्सिटी के सबसे विवादित और साथ ही चर्चित प्रोफ़ेसर रहे मटुकनाथ रिटायर हो रहे हैं. उन्हें ‘लवगुरु मटुकनाथ’ भी कहा जात है. वजह रहा उनका बेहद चर्चित प्रेम प्रसंग. जुली नाम की सपनी स्टूडेंट से प्यार कर बैठने वाले प्रोफ़ेसर मटुकनाथ को इसके लिए काफी विवादों का सामना करना पड़ा था. साल 2006 में सेवा से निलंबित किये जाने के बाद इसी मामले को लेकर 2009 में उन्हें बर्खास्त भी कर दिया गया था. हालांकि दो साल बाद एक बार फिर उनकी सेवा बहाल कर दी गई थी.

आज बुधवार 31 अक्टूबर को अपने रिटायरमेंट के दिन उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने खुद को 65 साल का लरिका (लड़का) बताया है. साथ ही कहा है कि यह मेरा स्वाधीनता दिवस है. आगे उन्हीं के शब्दों में पढ़िए पूरी बात –

“चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी

मैं 65 वर्ष का लरिका हूं. मेरी जवानी ने अभी अंगड़ाई ली है. मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है. जब मैं मस्त होकर तेज चलता हूं तो लोग नजर लगाते हैं. दौड़ता हूं तो दांतों तले उंगली दबाते हैं —

अब हम कैसे चलीं डगरिया
लोगवा नजर लगावेला.

मेरी खुशनसीबी कि इस चढ़ती जवानी में रिटायर हो रहा हूं. लोग पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद क्या कीजिएगा ?

चढ़ती जवानी में जो किया जाता है, वही करूंगा.
मतलब ?

मतलब यह कि मैं ब्याह करूंगा. बरतुहार बहुत तंग कर रहे हैं. उनकी आवाजाही बढ़ गई है. लेकिन मैं एक अनुशासित, शर्मीला और परंपरा प्रेमी लरिका हूं. इसलिए खुद बरतुहार से बात नहीं करता हूं.उन्हें गार्जियन के पास भेज देता हूं. मेरे विद्यार्थी ही मेरे गार्जियन हैं. वे जो तय कर देंगे, आंख मूंदकर मानूँगा. उनसे बड़ा हितैषी मेरा कोई नहीं हो सकता.

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हंसी-मजाक छोड़िए. बताइये कि रिटायरमेंट के बाद क्या योजना है ? क्योंकि आप जो योजना बनाते हैं, उसे पूरा करके ही दम मारते हैं.

विदा हुआ वह मटुकनाथ जो योजना बनाता था और उसे पूरा करने में लहू सुखाता था. अब हम केवल मस्ती करेगा. सबसे पहले हम ब्याह करेगा. इसलिए आपलोगों का दायित्व है कि एक सुटेबल कन्या से मेरा ब्याह कराइये, फिर मेरी चाल देखिए. विवाह के पहले कुछ नहीं करने का. कुछ नहीं सोचने का.

आज मेरा रिटायरमेंट डे है. वास्तव में यह मेरा स्वाधीनता दिवस है. व्यर्थ के कार्यों से मुक्ति मिलने का आनंद मेरी रगों में दौड़ रहा है. विश्वविद्यालय के क्लास बकवास हैं. विद्यार्थियों की प्रतिभा कुंद करने के सिवा वहाँ कोई रचनात्मक काम संभव नहीं. खुशी इस बात की है कि इस हिंसात्मक शिक्षा में जुटे रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल रही है. अब मैं जिस दिशा में कदम रखूंगा, वह वास्तविक शिक्षा होगी. किंतु, मैं कोई योजना बनाकर उसे पूरा करने के तनाव में नहीं पड़ूंगा. मन की तरंग पर सवार होकर उड़ूंगा. अस्तित्व जो करवाना चाहेगा, उसी की इच्छा में अपनी इच्छा को लय करूंगा.

आत्म-सुख मेरी प्राथमिकता होगी. मेरी समझ है कि केवल सुखी व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाने में सहायक हो सकता है. समाज, देश और दुनिया को बदलने का नारा विशुद्ध धोखा है.”

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