पटना : इस इलाके में अब होने लगी सौ साल पुराने कुआं की सफाई, प्यास बनी वजह

लाइव सिटीज, पटना (अजीत) : भीषण गर्मी में जब लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ गया तब जाकर ग्रामीणों ने सौ साल पुराने कुआं का उद्धार करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों ने कूड़े और कचरे से भरे सुख चुके कुआं की साफ़-सफाई करके उसके जल को उपयोग करने लायक तैयार कर दिया. कुछ ही घंटे की मेहनत के बाद कुआँ का स्वच्छ जल ग्रामीणों के सामने आ गया.

बता दें कि बिहटा प्रखंड के गोढ़ना गाँव में भीषण गर्मी के कारण भू जलस्तर नीचे जाने के कारण अधिकांश निजी चापाकल सूख चुका है, जिसके कारण गरीब परिवार में पानी को लेकर हाहाकार मचा है. उनलोगो के लिए पश्चिम भर का पुराना कुंआ ही एकमात्र जलस्रोत बचा है. इस कुंआ पर सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिए लोगो की कतार लगी रहती है. यह कुंआ काफी पुराना था जो पहले काफी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था. पानी पीने लायक भी नहीं था.

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लगभग दस वर्ष पहले ग्रामीण के आपसी आर्थिक और शारीरिक सहयोग से इसका जीर्णोद्धार किया गया था. तबसे इसका इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन गर्मी के मौसम में सूखने की स्थिति हो जाती है. कुंआ के अंदर का भाग मिट्टी भरने के कारण जल्द सूख जाया करता था. ग्रामीणों के द्वारा मंगलवार को कुंआ से मिट्टी उड़ाही का कार्य किया गया.

गाँव के बुजुर्ग लोगों का कहना है कि इस कुंआ को बने लगभग 100 वर्ष हो गया है और इतने वर्ष के बीच इस बार पहली बार मिट्टी निकासी और कुंआ की संपूर्ण सफाई हुआ है. कुंआ से लगभग चार-पाँच फुट मिट्टी निकाली गयी.

लोगो का कहना है कि अब यह कुंआ गर्मी में भी नहीं सूखेगा. वही ग्रामीण लोगो में स्थानीय जनप्रतिनिधि और राज्य सरकार के प्रति काफी आक्रोश है. उनलोगो का कहना है कि यहाँ तीन वार्ड में अभी तक सिर्फ एक वार्ड में नल-जल योजना का काम हुआ है, लेकिन टंकी नहीं लगने के कारण अभी पानी चालू नहीं हुआ है. गाँव में चापाकल की संख्या मात्र चार है, उसमे एक ही चालू है बाकि बंद पड़ा है. ऐसे में गाँव के गरीब लोगो के बीच पानी को लेकर काफी किल्लत है. वे अपने आस-पड़ोस के घर में लगे समरसेबुल पर या कुंआ पर आश्रित हैं.

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