समारोह में बोले साहित्यकार शिवदयाल, औपनिवेशिक दासता से मुक्ति की भाषा है हिंदी

पटना में पीआईबी और आरओबी की ओर से आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में सम्मानित करते अतिथि.

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पटना स्थित मीडिया ईकाई पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) एवं लोक संपर्क एवं संचार ब्यूरो (आरओबी) ने हिंदी दिवस पर समारोह का आयोजन किया. इसे लेकर पिछले पखवाड़े कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं. पटना के कर्पूरी ठाकुर सदन स्थित पत्र सूचना कार्यालय परिसर में शुक्रवार को आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में तमाम प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया.

इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि एवं प्रसिद्ध साहित्यकार शिवदयाल, आरओबी के निदेशक विजय कुमार, पीआईबी के निदेशक दिनेश कुमार, सहायक निदेशक संजय कुमार, सूचना सहायक पवन कुमार, सूचना सहायक भुवन कुमार, आरओबी के प्रदर्शनी सहायक मनीष कुमार सहित अन्य कर्मचारीगण भी मौजूद थे.

समारोह में मुख्य अतिथि शिवदयाल ने कहा कि हिंदी भाषा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हिंदी औपनिवेशिक दासता से मुक्ति की भाषा है. वस्तुतः हमारे लिए यह स्वाधीनता की भाषा है. यह हमारे लिए गर्व की बात है कि विश्व में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो औपनिवेशिक मुक्ति का माध्यम बनी. उन्होंने कहा कि भाषा मां के समान होती है और भाषा की सेवा वस्तुतः माता की सेवा है. उन्होंने हिंदी की वर्तमान चुनौती पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी तब तक बेहतर स्थिति में नहीं आ सकती, जब तक यह सत्ता प्राप्ति का माध्यम बनी रहेगी.

उन्होंने हिंदी को लेकर विगत सालों में जो नीतिगत निर्णय लिए गए, उस पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हिंदी स्वतंत्रता पूर्व भारत में संपर्क की भाषा थी, तो आखिर स्वतंत्र्योत्तर भारत में संपर्क भाषा के रूप में क्यों स्वीकार्य नहीं रह पाई? शिवदयाल ने हिंदी दिवस को राजकीय अनुशासन से इतर नैतिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की भी आग्रह किया.

पटना में पीआईबी और आरओबी की ओर से आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में बोलते अतिथि.

लोक संपर्क एवं संचार ब्यूरो के निदेशक विजय कुमार ने कहा कि आज भी संपर्क भाषा के रूप में हिंदी का विशिष्ट महत्व है. इसके प्रति हमारा सम्मान इसलिए भी बना होना चाहिए, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है. हिंदी हमारी मौलिक अभिव्यक्ति का माध्यम है अतः इसका अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीआईबी, पटना के निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि रचनात्मक की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति मातृभाषा और अपनी संस्कृति में ही होती है, इसलिए जरूरी है कि हम व्यक्तिगत शब्दकोष का विस्तार करते रहें, ताकि किसी भी परिस्थिति में शब्दाभाव जैसी स्थिति नहीं बने. उन्होंने कार्यालय में हिंदी भाषा के प्रयोग तथा भाषाई मानकीकरण की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि मानक भाषा के प्रयोग की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसे किस प्रकार सरल रूप से अभिव्यक्त किया जाय. किसी भी भाषा को सरल से सरल स्वरूप में अभिव्यक्त करने का पहला कदम यह है कि हम उस भाषा से जुडीं साहित्य का अध्ययन करें और फिर उसे आत्मसात कर अभिव्यक्त करें.

पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि भाषा के रूप में हिंदी हमारी उपलब्धि है. यह एक समृद्ध भाषा है तथा इसका अनुप्रयोग हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को परिलक्षित करता है. उन्होंने कहा कि कार्यालय में हिंदी के प्रयोग को विस्तार देने के लिए आवश्यक है कि सरकारी कर्मी राजभाषा विभाग के द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों का अध्ययन करें. हिंदी के अनुप्रयोग और उसके विकास में भागीदारी को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझें.

हिंदी पखवाड़ा के दौरान हिंदी निबंध, अनुवाद एवं सामान्य हिंदी ज्ञान से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों कार्यालयों के कर्मचारियों ने भाग लिया. इन प्रतियोगिताओं का प्रथम पुरस्कार आरओबी के क्षेत्रीय प्रचार सहायक नवल किशोर झा, द्वितीय पुरस्कार पीआईबी की सीजी-II स्मृति सिंह एवं तृतीय पुरस्कार पीआईबी के सीजी-II ज्ञान प्रकाश को प्रदान किया गया. विभिन्न प्रतियोगिताओं का संचालन पीआईबी के सूचना सहायक भुवन कुमार एवं पवन कुमार सिन्हा द्वारा किया गया. समापन समारोह का संचालन पीआईबी, पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार ने किया. कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन आरओबी की अंजना झा ने किया.

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