Caste Census : जातीय जनगणना पर बिहार में तेज हुई सियासत, आरजेडी के सुर में सुर में मिलाया जेडीयू; पप्पू यादव ने मोदी सरकार को घेरा

लाइव सिटीज, पटना : 2021 में होनेवाली जनगणना में जातीय आंकड़े नहीं दिए जाएंगे. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि जनगणना में केवल एससी-एसटी के आंकड़े दिए जाएंगे. यह क्लियर हो जाने के बाद अब इसे लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है. विपक्ष की ओर से बयानबाजी होने लगी है. आरजेडी के अलावा जेडीयू ने भी फिर से अपनी मांग को दोहराया है. जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि जातीय जनगणना जरूरी है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी जातीय जनगणना की मांग दोहरायी है. जबकि, जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने भी इसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तंज कसा है.

जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जातीय जनगणना का प्रकाशन बहुत जरूरी है. जनगणना में जाति का कॉलम होना ही चाहिए. किसी भी योजना को बनाने का आधार जनसंख्या ही है, इसलिए जातिगत गणना और उसका प्रकाशन निश्चित रूप से होना चाहिए. जातीय जनगणना से यह भी पता चलेगी कि किस जाति की कितनी संख्या है. और यह हम ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुका है. इतना ही नहीं, अलग-अलग अदालतों ने भी ऐसा ही कहा है. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं, जनसंख्या के आधार पर बनती हैं. और जनसंख्या मालूम ही नहीं है. ओबीसी की कितनी संख्या है, मालूम ही नहीं है, फिर योजनाएं कैसे बनेंगी?

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि बिहार के दोनों सदनों में बीजेपी जातीय जनगणना का समर्थन करती है, लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान करवाती है. केंद्र सरकार ओबीसी की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? बीजेपी को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफ़रत क्यों है? उन्होंने कहा ​कि जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे. मोदी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या उन पिछड़े वर्गों के 70-80 करोड़ लोग हिंदू नहीं है?

उधर, जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने भी ट्वीट कर केंद्र के निर्णय पर तंज कसा है. उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार को घेरा है. उन्होंने भी कहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार जातीय जनगणना से क्यों भाग रही है. जातीय जनगणना आने से क्या गरीब-गुरबों के असली आंकड़े पता चल जाएंगे. यह भी पता चल जाएगा कि ओबीसी की संख्या कितनी है.