कर्नाटक का नाटक : किस्मत का मारा येदियुरप्पा बेचारा, चार बार बने सीएम, लेकिन कभी भी पूरा नहीं हुआ कार्यकाल

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : उत्तराखंड की तरह अब कर्नाटक में भी बीजेपी ने अपना सीएम बदल दिया है. बीएस येदियुरप्पा ने अपना इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया गया है. नए सीएम के नामों पर मंथन भी शुरू हो गया है. लेकिन येदियुरप्पा को किस्मत का मारा ही कह सकते हैं. इनकी किस्मत में चार बार मुख्यमंत्री बनना लिखा था. लेकिन कोई भी कार्यकाल इनका पूरा नहीं हो सका है. चौथा कार्यकाल भी इनका अधूरा ही रहा. आज 26 जुलाई को ही दो साल बीजेपी सरकार का पूरा हुआ और किस्मत ने ऐसा खेल दिखाया कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

बीएस येदियुरप्पा सबसे पहले 12 नवंबर 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, लेकिन महज सात दिन बाद यानी 19 नवंबर 2007 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद 30 मई 2008 को दूसरी बार मुख्यमंत्री बने. भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते उन्हें 4 अगस्त 2011 को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी. तीसरी बार 17 मई 2018 को येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. लेकिन उस बार भी किस्मत ने धोखा दे दिया. महज छह दिन बाद 23 मई 2018 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया. चौथी बार 26 जुलाई 2019 को मुख्यमंत्री बने और ठीक दो साल बाद आज सोमवार को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

खास बात कि कर्नाटक में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं और येदियुरप्पा की लिंगायत समुदाय पर मजबूत पकड़ है. ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस समुदाय को साधने की होगी. बीते दिन ही विभिन्न लिंगायत मठों के 100 से अधिक संतों ने येदियुरप्पा से मुलाकात कर उन्हें समर्थन की पेशकश की थी. संतों ने बीजेपी को चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें हटाया गया, तो परिणाम भुगतने होंगे.

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय 17% के आसपास है. राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से तकरीबन 90-100 सीटों पर लिंगायत समुदाय का असर है. राज्य की तकरीबन आधी आबादी पर लिंगायत समुदाय का प्रभाव है. ऐसे में बीजेपी के लिए येदियुरप्पा को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. ऐसा होने का मतलब इस समुदाय के वोटों को खोना होगा. बहरहाल, कर्नाटक में राजनीति का नाटक शुरू हो गया है. नए सीएम कौन होंगे, आज से कल तक में पता चल जाएगा. अभी कई नाम दौर में हैं. इनमें पहला नाम बसवराज बोम्मई का है. इनके अलावा विश्वेश्वरा हेगड़े कगेरी, एमआर निरानी व प्रहलाद जोशी के नाम पर विचार किए जा सकते हैं.