तब प्रधान मंत्री को भी हड़कने के बाद फोन पटक देते थे लालू प्रसाद

-निहारिका सिंह-

पटना : फिर कहती हूं बात वक्‍त-वक्‍त की है. चर्चा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की ही कर रही हूं. शुरुआत के लिए आपको सीधे साल 1996 में लिए चलती हूं. बिहार में लालू प्रसाद के चारा घोटाले का भांडा फट चुका था. सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच के पटना हाई कोर्ट के आर्डर को कंफर्म कर चुका था. लालू प्रसाद के बचे रह पाने के दिन कम होते जा रहे थे. हां, अभी लालू प्रसाद से सीबीआई ने पूछताछ नहीं की थी.



तभी 1996 में देश में लोक सभा चुनाव का बिगुल बजा. बिहार तब अखंड था. मतलब झारखंड अलग नहीं हुआ था. इस समय बिहार के पास लोक सभा की 54 सीटें हुआ करती थी. लोक सभा चुनाव ने लालू प्रसाद को दोहरा झटका दिया. बिहार में समता पार्टी (आज की जदयू) और भाजपा का पहली बार चुनावी गठबंधन हो गया था. आगे देश के बड़े पत्रकार संकर्षण ठाकुर की किताब ‘बंधु बिहारी’ से आपको बताती हूं.

कमजोर होने लगे थे लालू प्रसाद

1996 के लोक सभा चुनाव के जब परिणाम आए, तो चारा घोटाले में घिरते जा रहे लालू प्रसाद को और निराशा हुई. पिछले लोक सभा चुनाव की तुलना में लालू प्रसाद के सांसद 32 से घटकर 22 हो गये थे.

लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

पर, देश का संपूर्ण जनादेश भी खंडित था. कांग्रेस हार चुकी थी. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, किंतु बहुमत से दूर थी. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधान मंत्री पद की शपथ ली, लेकिन 13 दिनों में ही बहुमत के अभाव में वाजपेयी सरकार का पतन हो गया.

अब केन्‍द्र में खेलने लगे लालू प्रसाद

वाजपेयी के इस्‍तीफे के बाद केन्‍द्र में संयुक्‍त मोर्चा का उदय हुआ. लालू प्रसाद के मन में भी प्रधान मंत्री बनने की चाहत जन्‍म लेने लगी. लेकिन दिक्‍कत यह थी कि उनके पास सिर्फ 22 सांसद थे. और, तब चारा घोटाले का पर्दा फट जाने के कारण कांग्रेस और कम्‍युनिस्‍ट उनके खिलाफ खड़े थे. संयुक्‍त मोर्चा की सरकार बाहर से बगैर कांग्रेस के समर्थन के नहीं बन सकती थी.

पश्चिम बंगाल के मुख्‍य मंत्री ज्‍योति बसु के प्रधान मंत्री बनने पर सीपीएम तैयार नहीं हुई थी. आंध्र प्रदेश के मुख्‍य मंत्री चंद्रबाबू नायडू अभी केन्‍द्र में नहीं आना चाहते थे. ऐसे में, कर्नाटक के मुख्‍य मंत्री एचडी देवगौड़ा देश के प्रधान मंत्री बन गये.

लालू प्रसाद की केन्‍द्र में हैसियत सांसदों के संख्‍या बल के हिसाब से सरकार बनाने की तो नहीं थी, लेकिन बिगाड़ देने की जरुर थी. मतलब जब चाहते, देवगौड़ा का सामान बांधकर सत्‍ता से बाहर करने के लिए पर्याप्‍त थे.

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पूर्व पीएम एच डी देवगौड़ा
देवगौड़ा काल बने लालू प्रसाद के लिए

प्रधान मंत्री देवगौड़ा ने अपने कार्यकाल में जोगिंदर सिंह को सीबीआई का डायरेक्‍टर बनाया. लालू प्रसाद को लगा कि उन्‍हें राहत मिलेगी. पर ऐसा हो नहीं पाया. अब सीबीआई जनवरी 1997 में मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद से चारा घोटाले में पूछताछ के लिए तैयार थी.

लालू प्रसाद की परेशानी बढ़ती जा रही थी. पटना में बैठकर चारा घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के ज्‍वायंट डायरेक्‍टर यू एन विश्‍वास लालू प्रसाद को घेर चुके थे. बचाव का और कोई रास्‍ता नहीं देख लालू प्रसाद ने फोन कर प्रधान मंत्री देवगौड़ा को धमकाया.

फटकार लगाते हुए लालू प्रसाद ने देवगौड़ा को फोन पर कहा – ‘यह सब अच्‍छा नहीं हो रहा है. जो आप करवा रहे हैं,इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. साजिश करना है तो भाजपा के खिलाफ करो, हमारे पीछे क्‍यों पड़े हो 

देवगौड़ा को ऐसे धमाकों की आदत थी. सो, उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर अपनी लाचारी व्‍यक्‍त कर दी.

देवगौड़ा बोले – भैंस नहीं, सरकार चलाता हूं

प्रधान मंत्री देवगौड़ा और लालू प्रसाद की टकराहट अब आमने-सामने हुई. अवसर था सीबीआई की पूछताछ से पहले जनवरी 1997 में जनता दल की संचालन समिति की बैठक का. लालू बोले – ‘का जी देवगौड़ा, इसीलिए तुमको पीएम बनाया था कि तुम हमारे खिलाफ केस तैयार करो. बहुत गलती किया तुमको पीएम बना के.’

देवगौड़ा ने भी लालू प्रसाद को उन्‍हीं की शैली में जवाब दिया – ‘भारत सरकार और सीबीआई कोई जनता दल तो है नहीं कि भैंस की तरह इधर-उधर हांक दिया. आप पार्टी को भैंस की तरह चलाते हैं, लेकिन मैं भारत सरकार चलाता हूं.’

अब गुजराल को पीएम बनाया लालू प्रसाद ने

लालू प्रसाद को देवगौड़ा से राहत नहीं मिली. पर, उन्‍हें प्रधान मंत्री पद से भी कई और कारणों के साथ जल्‍द हटना पड़ा. अब लालू प्रसाद खुद प्रधान मंत्री बनकर अपनी सभी समस्‍या का अंत कर लेना चाहते थे. लेकिन यह भी संभव नहीं हो पाया.

संयुक्‍त मोर्चा में बात किसी यादव नेता को प्रधान मंत्री बनाने की तय हो गई थी. मुलायम सिंह यादव का नाम करीब-करीब तय था. लेकिन लालू प्रसाद ने यह कहकर टांग मार दी कि यादव को ही बनाना है तो मैं क्‍यों नहीं. इस तरह न मुलायम बने और न लालू.

पर, नामों की लड़ाई में लालू प्रसाद ने इंद्र कुमार गुजराल का नाम आगे लाकर सबों को परास्‍त कर दिया. गुजराल के नाम पर सभी सहमत हो गये थे, लेकिन खुद गुजराल को कुछ भी पता नहीं था. सो रहे गुजराल को तो लालू प्रसाद के फोन ने जगाया. लालू ने फोन कर कहा था – ‘गाड़ी भेज रहा हूं, आ जाइए, आपको प्रधान मंत्री बनना है.’

गुजराल को इसलिए चुना लालू यादव ने

इंद्र कुमार गुजराल को उनके अनुभवों के कारण लालू प्रसाद ने नहीं चुना था. लालू जानते थे कि अभी गुजराल अकेले ऐसे हैं, जो उनका अहसान मानेंगे और सीबीआई की मार से मुक्ति दिला देंगे.

दरअसल, गुजराल को लालू प्रसाद ने बिहार से राज्‍य सभा में भेज कर उपकृत कर रखा था. वे बिहार के रहने वाले नहीं थे, फिर भी लालू प्रसाद ने उनके लिए पटना के सब्‍जीबाग में पता-ठिकाना बनाया था. अनवर अहमद के घर में गुजराल के लिए लेटर बॉक्‍स टांगा गया था. सो, लालू प्रसाद को लगा कि गुजराल से बेहतर कोई दूसरा संकटमोचक नहीं हो सकता.

गुजराल के प्रधान मंत्री बनते ही लालू प्रसाद ने पुराने कैबिनेट के मंत्री देवेन्‍द्र प्रसाद यादव को हटवा दिया था. लालू को लगने लगा था कि देवेन्‍द्र प्रसाद यादव औकात भूल रहे हैं और चारा घोटाले पर सवाल पूछ रहे हैं.

गुजराल भी नहीं बचा पाए लालू प्रसाद को

परेशान लालू तंत्र-मंत्र का सहारा लेने में लग गये थे. आज वे गंगा पार नागा बाबा की शरण में थे. बाबा ने आशीर्वाद दिया था. कई घंटे की पूजा-पाठ के बाद लालू प्रसाद खुशी-खुशी पटना में मुख्‍य मंत्री आवास 1, अणे मार्ग लौटे थे. तब तक मोबाइल क्रांति बहुत नहीं आई थी. लौटते ही लालू प्रसाद ने टीवी खोला.

सीबीआई के पूर्व डायरेक्‍टर जोगिंदर सिंह

जैसे ही टीवी खुला, लालू प्रसाद के दिमाग का फ्यूज उड़ गया. सीबीआई के डायरेक्‍टर जोगिंदर सिंह सभी न्‍यूज चैनल पर एलान कर रहे थे कि सीबीआई चारा घोटाले में लालू प्रसाद के खिलाफ मिले सबूतो से संतुष्‍ट हो गई है. अब सीबीआई बिहार के मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद के अगेंस्‍ट चार्जशीट दाखिल करेगी.

गुजराल को तुरंत फोन मिलाया गया

टीवी चैनल पर जोगिंदर सिंह के एलान से हैरान-परेशान लालू प्रसाद ने तुरंत प्रधान मंत्री इंद्र कुमार गुजराल को फोन मिलवाया.प्रधान मंत्री गुजराल के लाइन पर आते ही लालू बोले – ‘ क्‍या हो रहा है यह सब. यह सब क्‍या बकवास करा रहे हैं आप. एक पीएम को हटा के आपको बनाया और आप भी वही काम करवा रहे हैं.’

दूसरी ओर से प्रधान मंत्री गुजराल अपनी लाचारगी बता रहे थे. लेकिन लालू प्रसाद ने उनकी बात के बीच में ही फोन पटक दिया था.

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