राजद का बड़ा आरोप : नीतीश कुमार के लिए राजनीति में अब अ​केले चल पाना मुमकिन नहीं

शिवानंद तिवारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आरजेडी, (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला किया हे. उन्होंने साफ कहा ​है कि नीतीश कुमार के पास अब रास्ता नहीं है. बिहार की राजनीति में अकेले चल पाना उनके लिए अब मुमकिन नहीं है. अब तक के अपने राजनीतिक जीवन में दो मर्तबा अकेले चले हैं. 1995 में समता पार्टी उनके नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव लड़ी थी. नतीजा सबको याद है. दूसरी मर्तबा 2014 का पिछला लोकसभा चुनाव वे अकेले लड़े. तीसरे स्थान पर रहे.

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भले ही बिहार में तीसरे नंबर पर हैं. लेकिन, आकांक्षा उनकी हमेशा पहले स्थान बने रहने की रही है. इसलिए वे जहां रहते हैं, वहां की मुख्य ताक़त से अपने को अलग दिखाकर अपनी विशिष्टता साबित करना उनकी पुरानी रणनीति रही है. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में जब भी उन्होंने यह रणनीति अपनाई है, वे अपने तत्कालीन गठबंधन से अलग हुए हैं. इसके पहले एनडीए से अलग होने के पहले ज़ोर शोर से उन्होंने नरेंद्र मोदी की साम्प्रदायिक और विभाजनकारी छवि का सवाल उठाया था. इसका उन्हें अप्रत्याशित लाभ भी मिला. देश उनको उन्हें मोदी जी के विकल्प के रूप में देखने लगा था.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव महागठबंधन के साथ लड़े. लेकिन, सरकार बनाने के बाद जब भी मौक़ा मिला, वहां भी अपने को अलग दिखाने के अंदाज पर वे क़ायम रहे. नोटबंदी का तत्काल समर्थन कर दिया. समर्थन के सार्वजनिक एलान के पहले गठबंधन के अपने सहयोगियों को अपनी अलग राय से अवगत करने का शिष्टाचार भी नहीं निभाया. राष्ट्रपति के चुनाव में या तथाकथित सर्जिकल स्ट्राइक के मामले में भी उन्होंने यही किया. और अंततोगत्वा पुनः एनडीए के शरण मे आ गए. ऐसा उन्होंने क्यों किया इस रहस्य पर अभी भी पर्दा पड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा कि अब योग दिवस में भाग नहीं लेने की घोषणा नीतीश कुमार की ओर से हो गई है. वे आगे अब क्या करेंगे? उनके सामने अब रास्ता क्या है ? यह सवाल उठना स्वभाविक है. बिहार की राजनीति मे कोई तीसरा पक्ष नहीं है. लोकसभा का अगला चुनाव सीधा होनेवाला है. इस तथ्य से सब वाक़िफ़ हैं. महागठबंधन का दरवाज़ा उनके लिए बंद है. आज भी तेजस्वी ने एक चैनल को इंटरव्यू में कहा है कि इस मामले में पार्टी तय करेगी. लेकिन, नीतीश कुमार को महागठबंधन में पुन: शामिल किया जाए, इस राय से इत्तफ़ाक़ नहीं रखते हैं. तब नीतीश कुमार के इस पैंतरे का क्या मतलब है!

बिहार कैबिनेट : कॉन्ट्रैक्ट वाले डॉक्टर अब 67 की उम्र में होंगे रिटायर, मानसून सत्र 20 जुलाई से

उन्होंने कहा कि मौजूदा लोकसभा में दो सांसद वाली पार्टी के नेता नीतीश कुमार की बेचैनी का सबब समझा जा सकता है. बिहार एनडीए में एक समय बड़े भाई की हैसियत रखने वाले नीतीश कनिष्ठ की भूमिका की आशंका से बेचैन हैं. अपनी पुरानी हैसियत हासिल करने की छटपटाहट हैं. लेकिन क्या यह मुमकिन है! भले आपके दरवाज़े पर कभी हाथी झुमता था. पर, उसका सिकड़ दिखाकर आप उस हैसियत को आज हासिल नहीं कर सकते हैं.

राजद नेता ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश मंत्रीमंडल में शामिल भाजपा के मंत्री लालच में भले ही उनका नख़रा सहन कर रहे हों, किंतु चुनाव में सीटों का फैसला तो मोदी-शाह की जोड़ी करेगी. यह घाघ जोड़ी है. नीतीश कुमार का नख़रा कितना झेलेंगे! पिछले उपचुनावों मे नीतीश कुमार की ताक़त का आकलन हो ही चुका है. अभी तक मोदी सरकार के व्यवहार से भी स्पष्ट हो चुका है कि उनको अब पुरानी हैसियत हासिल होने वाली नहीं है. पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने के नीतीश कुमार की हाथजोड़ी को जिस प्रकार नरेंद्र मोदी ने झटक दिया, वह सबके सामने है. या पिछले वर्ष की भीषण बाढ़ पर सहायता की राशि की मांग अनसुनी की गई, यह भी प्रत्यक्ष है. इसलिए मुझे नहीं लगता है कि नीतीश कुमार की पिटी-पिटाई रणनीति अब कारगर होनेवाली है.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*