शिवानंद तिवारी जेल में मिल आये आनंद मोहन से, कहा – निर्दोष को फंसाया गया है

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने आज शुक्रवार 2 फरवरी को पूर्व सांसद आनंद मोहन से मुलाक़ात की है. आनंद मोहन से शिवानंद तिवारी की मुलाक़ात के बाद बिहार की राजनीति में सियासी हंगामा खड़ा होना वाजिब था, जो हुआ भी. माना जा रहा है कि राजद अब इस बहाने बिहार के सवर्ण ‘ठाकुर’ वोटबैंक को साधने की कोशिश में लग गया है. आनंद मोहन एक जमाने में उत्तर बिहार के ‘रॉबिनहुड’ के तौर पर जाने जाते थे.

शिवानंद तिवारी ने आज सहरसा जेल में जाकर आनंद मोहन से मुलाक़ात की है. दोनों की मुलाक़ात करीब घंटे भर चली. हालांकि मुलाक़ात के बाद शिवानंद तिवारी ने मीडियाकर्मियों को इसके कोई राजनीतिक मायने न निकालने को कहा. लेकिन पोलिटिकल कोरिडोर में चर्चाएं तो गरम होने ही लगी हैं. राजद की ओर से पहले शिवानंद तिवारी और अन्य नेता रालोसपा की ‘शिक्षा सुधार-मानव कतार’ रैली में शामिल हो चुके हैं. बिहार के पूर्व सीएम-सह-हम प्रमुख जीतन राम मांझी के मन में भी राजद के लिए सॉफ्ट कार्नर बनता पोलिटिकल पंडित देख ही रहे हैं.

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शिवानंद तिवारी (फाइल फोटो)

‘निर्दोष हैं आनंद मोहन, उन्हें फंसाया गया’

सहरसा जेल में सजा काट रहे आनंद मोहन से मुलाक़ात के बाद शिवानंद तिवारी ने उन्हें निर्दोष बताया है. एक न्यूज़ चैनल से उन्होंने ये बात कही है. तिवारी ने कहा है कि आनंद मोहन को फंसाया गया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आनंद मोहन उनके पुराने सहयोगी रहे हैं और उन्होंने उनके इलेक्शन में प्रचार भी किया था. पुरानी मित्रता का हवाला देकर उन्होंने कहा कि आनंद मोहन और उन्होंने अपने कई संस्मरणों को साझा किया और इसका कोई सियासी मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए.

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पूर्व सांसद आनंद मोहन (फोटो : BBC)

कभी नीतीश कुमार के करीबी थे आनंद मोहन

गौरतलब है कि आनंद मोहन इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से खासे नाराज चल रहे हैं. काफी सालों से आनंद मोहन का संबंध नीतीश कुमार से बिगड़ा हुआ है. जेल में कई बार आनंद मोहन के साथ उचित व्यवहार नहीं होने और प्रताड़ित किए जाने की भी खबरें आती रही हैं. फिलहाल वे गोपालगंज के पूर्व डीएम जी. कृष्णैया हत्याकांड में सजा काट रहे हैं.

‘हम’ में हैं पत्नी लवली आनंद

आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद अभी पूर्व सीएम जीतन रामा मांझी की पार्टी ‘हम’ में हैं. वे आनंद मोहन की रिहाई के लिए ‘फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद’ नाम से एक गैर राजनीतिक संगठन का नेतृत्व भी करती हैं. आनंद मोहन एक जमाने में उत्तरी बिहार के कोसी क्षेत्र के बाहुबली माने जाते हैं. 1994 में लवली आनंद ने भी वैशाली लोकसभा का उपचुनाव जीतकर राजनीति में अपनी धमाकेदार एंट्री की थी.

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