‘देशभक्ति का दंभ न भरें मोदी, इसमें उनकी जमात का इतिहास उजला नहीं है’

पटना : बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के गुजरात चुनावों को लेकर दिए बयान पर राजद गरम हो गया है. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सुशील मोदी के बयान पर तीखा पलटवार किया है. वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा – छोटे मोदी ने अपने बयान में कहा है कि गुजरात में पाकिस्तान समर्थक हार रहे हैं. मुझे ग़लतफ़हमी थी कि छोटे मोदी पढ़ने-लिखने वाले व्यक्ति हैं. लेकिन इस बयान ने मुझे उनके प्रति अपनी धारणा को बदलने के लिये मजबूर कर दिया है.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि जिनको ये पाकिस्तान समर्थक बता रहे हैं, उन्होंने तीन मर्तबा उसे युद्ध में परास्त किया है. 1948, 1965 और 1971 के तीनों युद्ध में पाकिस्तान को भारत भारी शिकस्त दे चुका है. बल्कि 1971 के युद्ध में तो इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को दो टुकड़े में विभाजित करा दिया था. पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश के नाम से एक नया देश बन गया.



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फाइल फोटो

उन्होंने कहा – सुशील भूल जा रहें हैं कि इंदिरा जी की इस उपलब्धि के लिए स्वयं अटल जी ने उन्हें ‘दुर्गा’ की संज्ञा दी थी. सर्जिकल स्ट्राइक का शोर मचाने वाले यह क्यों भूल जा रहे हैं कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी जनरल नियाज़ी के साथ लगभग एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय फ़ौज के समक्ष समर्पण किया था. दुनिया के युद्ध के इतिहास में अपनी तरह की यह अनोखी घटना है.

तिवारी आगे कहते हैं – सुशील जी अटल जी की सरकार के समय 1999 में काठमांडू से भारतीय विमान के अपहरण की घटना को भूल जा रहे हैं. अपहरणकर्ताओं की माँग पर भारत की जेल में बंद पाकिस्तान के ख़ूँख़ार आतंकवादियों को निकालकर अटल जी की सरकार के ही उनके सहयोगी मंत्री कंधार पहुँचा आये थे. उन्हीं आतंकवादियों में एक ‘जैश-ए-मुहम्मद’ का संस्थापक मौलाना मसूद अज़हर भी था. इसी मसूद अज़हर ने 2001 में संसद भवन पर हमला करवाया था. आज भी वह हमारे देश के लिये सरदर्द बना हुआ है.

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डिप्टी सीएम सुशील मोदी (फाइल फोटो)

राजद उपाध्यक्ष ने डिप्टी सीएम पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सुशील को हमारी सलाह है कि अपनी देशभक्ति का दंभ ज़्यादा नहीं भरें. इस मामले में उनकी जमात का इतिहास उज्जवल नहीं है. आज भी अपने को देशभक्त और अन्यों को देशविरोधी क़रार देकर देश में नफ़रत फैलाने का अभियान से देश में बेवजह तनाव पैदा हुआ है. यह तनाव देश की मज़बूती तथा एकता और अखंडता के लिए ख़तरा पैदा कर रहा है.

उन्होंने कहा – इसके पूर्व तो सुशील कम से कम बिहार में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करते थे. लेकिन नीतीश कुमार द्वार महागठबंधन तोड़ कर पुन: मोदी के साथ गठबंधन करने के बाद स्थिति बदल गयी है. नीतीश कुमार आज न सिर्फ ऐसी भाषा सुन रहे हैं बल्कि ऐसी भाषा बोलकर समाज में नफ़रत फैलाने वालों को ताक़त पहुँचा रहे हैं. लेकिन राष्ट्रीय जनता दल अपने दायित्व को समझता है और जनता के बीच इनकी देश विरोधी राजनीति को उजागर करने का अपना अभियान जारी रखेगा.