बांका में रोप-वे से महज चार मिनट में पहुंच जाएंगे चोटी पर, आइए जानते हैं क्या है मंदार पर्वत की मान्यता

लाइव सिटीज, राजेश ठाकुर : धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं से लबरेज मंदार पर्वत (Mandar Mountain) पर पहुंचना अब और भी आसान हो गया. 786 मीटर ऊंचे पर्वत की चोटी पर अब आप महज 4 मिनट में पहुंच जाएंगे. आज इस पर्वत पर जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish KUmar) ने रोप-वे (आकाशीय रज्जू पथ) का लोकार्पण किया. आइए अब जानते हैं कि मंदार पर्वत बिहार (Bihar) में कहां है और इसकी मान्यता क्या है?

यह है धार्मिक-पौराणिक मान्यता
दरअसल, पौराणिक गाथाओं व धार्मिक ग्रंथों में लोग समुद्र मंथन की कहानी हमलोग बचपन (Childhood) से पढ़ते आ रहे हैं. हमने भी यह कहानी पढ़ी और हमारे पूर्वजों ने भी पढ़ी है और हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इसे पढ़ेंगी. किंवदंती है कि जब समुद्र मंथन हुआ था तो उसमें मथनी के रूप में मंदार पर्वत का ही इस्तेमाल किया गया था. कहा जाता है कि तब शेष नाग (Shesh Nag) को इसमें रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था. इस समुद्र मंथन से विष और अमृत समेत अन्य वेशकीमती चीजें निकली थीं. लेकिन अमृत (Honeydew) के लिए देवता व दानव में जबर्दस्त जंग छिड़ गयी थी. बाद में देवता के हिस्से में अमृत कलश आ गया था. यह भी मान्यता है कि मंदार पर्वत के नीचे मधु नामक राक्षस दबा हुआ है और मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर वे मधु से मिलने आते हैं.

मंदार पर्वत पहुंचने के हैं कई रूट
यह गौरव की बात है कि धार्मिक मान्यताओं से भरा-पूरा यह मंदार पर्वत बिहार की धरती पर है. यह बांका (Banka) जिले में अवस्थित है. आप पटना (Patna) से भागलपुर (Bhagalpur) होते हुए रेल मार्ग और सड़क मार्ग दोनों रूट से बांका पहुंच सकते हैं. पटना-धनबाद/आसनसोल रेलखंड पर अवस्थित वाया जसीडीह (Deoghar) होते हुए भी आप जा सकते हैं. सड़क मार्ग से पटना से लखीसराय, जमुई होते हुए भी बांका पहुंचा जा सकता है. बांका से मामूली दूरी पर बौंसी में यह मंदार पर्वत अवस्थित है. यूं कहें कि मंदार पर्वत भागलपुर-देवघर सड़क मार्ग पर अवस्थित है.

मकर संक्रांति पर लगता है मेला
मकर संक्रांति के दिन यहां काफी बड़ा आयोजन होता है. मंदार मेला व बौंसी मेला के नाम से ख्यातिलब्ध इस मेले को अब राजकीय दर्जा मिल गया है. यह दर्जा 2018 में मिला है. इस दिन अब सरकारी स्तर पर मंदार महोत्सव का आयोजन होता है. हालांकि, कोरोना संकट की वजह से पिछले साल मंदार महोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया था. मंदार पर्वत से सटे पापहारिणी तालाब है. मान्यता है कि मकर संक्रांति पर इस तालाब में नहाने से लोगों के पाप धुल जाते हैं. मंदार मेले में केवल हिंदू ही नहीं, जैन और सफा धर्मावलंबी भी जुटते हैं. कहा जाता है कि मंदार पर्वत के बगल में ही एक पहाड़ी है, जो जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर बासुपूर्व के न‍िर्वाण स्थल के रूप में फेमस है. इसके अलावा संथाली समुदाय के लोग भी काफी संख्या में जुटते हैं. अब रोप-वे ने इसमें चार चांद लगा दिया. पौराणिक, रमणीक और पर्यटन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण इस स्थल की खूबसूरती और बढ़ गई.