BREAKING : अब SC-ST एक्ट में फंस सकती हैं फरार चल रही मंजू वर्मा, जान लें क्या है मामला

Manju-verma
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बेगूसराय (सुधांशु पाठक) : बिहार के फॉर्मर सोशल वेलफेयर मिनिस्टर मंजू वर्मा की मुश्किलें बढ़ने वाली है. अवैध कारतूस मामले में तो अरेस्टिंग ऑर्डर है ही, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने उन पर FIR करने की अनुशंसा की है. मामला एक CDPO के साथ जातिसूचक टिप्पणी, अमर्यादित व्यवहार एवं रंगदारी से जुड़ा है.

क्या है मामला
बेगूसराय जिलान्तर्गत छौड़ाही प्रखंड (जो कि मंजू वर्मा का विधानसभा क्षेत्र भी है) में पदस्थापित तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी विनीता कुमारी ने अपने कार्यालय लेटर संख्या 358/20.11.2017 के माध्यम से जिलाधिकारी के नाम प्रेषित पत्र में उल्लेख किया है कि 19 सितंबर 2017 को दिन के लगभग 1 बजे मंत्री मंजू वर्मा अपने हसबैंड चंद्रशेखर वर्मा के साथ प्रखंड कार्यालय में आयोजित कौशल विकास भवन का उद्घाटन करने आई.

उद्घाटन समारोह सम्पन्न होने के पश्चात मंत्री एवं उनके हसबैंड उन्हें जाति सूचक शब्द कह कर कौशल विकास भवन के कम्प्यूटर कक्ष में चलने को कहा, जहां CDPO को निलंबित करने, जान से मारने की धमकी देने तथा शरीर गायब करने की धमकी दी गई. साथ ही मंत्री ने अपने एक रिश्तेदार महिला पर्यवेक्षिका का आदेश मानने का आदेश भी दे दिया. इस आशय की जानकारी CDPO ने बिहार के CM, चीफ सेक्रेटरी, समाज कल्याण के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एवं अनुसूचित जाति आयोग के डायरेक्टर को भी दे चुकी थी.

मामले पर आयोग ने लिया संज्ञान
CDPO विनीता के आवेदन पर SC-ST कमीशन ने संज्ञान लेते हुए पहले तो विनीता को एविडेंस के साथ अपना पक्ष रखने को कहा. विनीता ने 7 बिंदुओं का जवाब आयोग को दी, इस पर आयोग ने बेगूसराय के तत्कालीन SP को दो बिंदुओं पर कार्रवाई की अपेक्षा करते हुए आरोपी मंत्री व उनके पति के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने एवं CDPO को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने एवं कार्रवाई से सम्बंधित प्रतिवेदन आयोग को भेजने को कहा.

तत्कालीन SP ने क्या रिपोर्ट दी
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट में मंत्री को क्लीन चिट देते हुए CDPO द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए SC-ST कमीशन को भेज कर चैप्टर क्लोज कर दिया. SC-ST कमीशन द्वारा CDPO से मांगे गए एविडेंस में उल्लेख है कि इस मामले पर कोई भी पुलिस अधिकारी उनसे अथवा ग्रामीणों से पूछताछ नहीं की. इतना ही नहीं, छौड़ाही के प्रखंड प्रमुख ने अपने पत्रांक 7/3.2.18 में घटना की पुष्टि की है, पर उनकी रिपोर्ट को भी कनखी मार दी गई है.

यही नहीं CDPO विनीता कुमारी ने आयोग को भेजे जवाब में उल्लेख किया है कि बेगूसराय SP ने अपनी जांच रिपोर्ट में छौड़ाही के अंचलाधिकारी एवं थानाध्यक्ष को मंच पर उपस्थित होने का जिक्र किया है, जबकि ये दोनों अधिकारी मंच पर उपस्थित नहीं थे. इस बाबत CDPO ने फोटोग्राफ संलग्न करते हुए आयोग को उपलब्ध कराया है. साथ ही यह भी जिक्र किया गया कि इस पूरे मामले पर आयोग द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया, जबकि आज तक न तो प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही उनसे कोई पूछताछ ही की गई. सम्बंधित एविडेंस के बिना ही पुलिस अधीक्षक तथ्यहीन प्रतिवेदन आयोग को समर्पित किया है. इस प्रकार CDPO ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट को संदेहास्पद और मंत्री के प्रभाव में आकर गलत रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराया है. खैर, अब देखना दिलचस्प होगा कि CDPO द्वारा लगाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है?

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