तब जेल में चिकन – मटन की पार्टी करते थे लालू प्रसाद, अब खैनी भी मांगना पड़ता है

-निहारिका सिंह-

पटना : बिहार में इसे वक्‍त–वक्‍त की बात ही कहते हैं. फ्लैशबैक में आपको सीधे 30 जुलाई 1997 में लिए चलती हूं. चारा घोटाले में घिरे लालू प्रसाद बिहार के मुख्‍य मंत्री पद से इस्‍तीफा दे चुके थे. कांग्रेसी सीताराम केसरी के कहने पर उन्‍होंने अपनी पत्‍नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्‍य मंत्री बना दिया था. आज 30 जुलाई 1997 को गिरफ्तार होकर  उन्‍हें जेल जाना था. पटना में बड़ा ड्रामा चल रहा था. सड़कों पर खून फैल जाने का डर था. आर्मी को तैयार रहने को 29 जुलाई की रात में ही कह दिया गया था. तभी लालू प्रसाद 1, अणे मार्ग से सुबह में सरेंडर करने को एंबेसडर गाडि़यों के छोटे – से काफिले में निकल पड़े.



‘ लालू यादव जिंदाबाद ‘ की गूंज पटना की सड़कों पर 30 जुलाई 1997 की सुबह में भी थी. पर आम जनजीवन को तबाह करने जैसा कोई बड़ा गदर नहीं कटा था. सीबीआई कोर्ट ने उन्‍हें जेल भेजने का निर्देश दिया. पर, लालू प्रसाद जेल कैसे जाते. उन्‍होंने ऐसे ही वक्‍त के लिए तो राबड़ी देवी को मुख्‍य मंत्री पहले बना दिया था.

रांची के बिसरा मुंडा जेल कैंपस में लालू प्रसाद की तस्वीर

गेस्‍ट हाउस बन गया था जेल

देश के वरिष्‍ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर अपनी किताब ‘बंधु बिहारी’ में बताते हैं कि लालू प्रसाद की सुविधाओं का ख्‍याल रखते हुए मुख्‍य मंत्री राबड़ी देवी ने स्‍पेशल आर्डर के द्वारा वेटनरी कालेज कैंपस में स्थित बीएमपी के एयरकंडीशंड गेस्‍ट हाउस को जेल में परिवर्तित करा दिया था.

जेल बने बीएमपी के गेस्‍ट हाउस में रहते हुए भी लालू प्रसाद ही बिहार के असली सीएम बने रहे. सरेंडर करने को कोर्ट जाने से पहले ही लालू ने सबों से कह दिया था – ‘कुछ भी मेरी अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा. अगर आपको किसी बात पर दुविधा हो तो मुझसे पूछ लीजिएगा.’

संकर्षण ठाकुर बताते हैं कि कहने को जेल में रह रहे लालू प्रसाद ने कभी इस बात को छुपाकर नहीं रखा था कि राज्‍य वे ही चला रहे हैं. वे ऐसा खुलेआम कर रहे थे,बल्कि बेशर्मी से कर रहे थे.

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संकर्षण ठाकुर, सीनियर जर्नलिस्ट (फाइल फोटो)

मटन-चिकन पार्टी करते थे लालू

किताब ‘बंधु बिहारी’ में इस बात का उल्‍लेख बीएमपी गेस्‍ट हाउस जेल में बंदी लालू प्रसाद से  बराबर मिलने वाले एक पत्रकार के हवाले से है कि यह एक पिकनिक जैसा था, जिसका खर्च बिहार उठा रहा था. लालू प्रसाद के पास वहां हर चीज थी, जिसकी उन्‍हें जरुरत पड़ती थी. वे पूरे दिन दरबार सजाकर बैठते थे, अधिकारियों से मिलते थे और निर्देश देते थे.

लालू प्रसाद का खाना हॉटकेस में उनके घर से आता था, जिसे राज्‍य की मुख्‍य मंत्री अपने हाथों से पकाती थीं. जब वे मूड में होते तो चूल्‍हा मंगवाते और अपने व अपने अपने दोस्‍तों के लिए चिकन एवं मटन बनाते.

लालू प्रसाद का सेलफोन राज

बीएमपी गेस्‍ट हाउस जेल से ही लालू प्रसाद ने बिहार में सेलफोन राज की शुरुआत की. ‘अभी उनके दोनों हाथों में लड्डू थे. उनके पास पूरी ताकत थी,कोई जिम्‍मेवारी नहीं थी और जेल में होने के कारण लोगों की सहानुभूति थी.’

वे शासन-प्रशासन के सभी लोगों से सेलफोन के माध्‍यम से संपर्क में रहते थे. उन्‍हें निर्देश देते थे और सुनिश्चित करते थे कि उनका पालन हो रहा हो. जहां भी हस्‍ताक्षर की जरुरत होती, राबड़ी देवी अपना कर्तव्‍य समझकर हस्‍ताक्षर कर देतीं. हालांकि उन्‍हें ऐसा करना हमेशा मुसीबत वाला काम लगता था. अगर कोई भूले-भटके निर्देशों के लिए सीधे उनके पास आ जाता तो उसे एक ही जवाब मिलता – ‘साहेब से पूछिए.’

सुप्रीम कोर्ट ने भेजा बेऊर जेल

लालू प्रसाद चारा घोटाले में तब पत्‍नी राबड़ी देवी के मुख्‍य मंत्री रहते दो बार जेल गये. पहली बार 30 जुलाई 1997 से लेकर 11 दिसंबर 1997 तक. दूसरी बार 30 अक्‍तूबर 1998 से लेकर 8 जनवरी 1999 तक.

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पूर्व सीएम राबड़ी देवी (फाइल फोटो)

इस दरम्‍यान बहुत दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट लालू प्रसाद के आराम वाले बीएमपी गेस्‍ट हाउस जेल से खफा हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने क्रुद्ध आपत्तियां कीं. उन्‍हें असली जेल मतलब बेऊर जेल भेजने को कहा गया. अब लालू प्रसाद बेऊर जेल पहुंच गये. लेकिन यहां भी राबड़ी देवी ने उनकी आवश्‍यकताओं का विशेष ध्‍यान रखा. वे एक विशेष रुप से नामित खंड में रहते थे, जो बेऊर जेल के बाकी हिस्‍से से अलग बना हुआ था.

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और अब रांची जेल में ऐसे हैं लालू

अभी कुछ दिनों पहले 23 दिसंबर 2017 को चारा घोटाले के दूसरे मामले में सजा के काबिल समझे जाने पर लालू प्रसाद को रांची के सेंट्रल जेल में भेजा गया है. सजा कितनी, एलान 3 जनवरी 2018 को होना है ;

लालू प्रसाद रांची जेल में पहले भी रह चुके हैं. लेकिन तब-अब में फर्क है. सबसे बड़ा फर्क कि झारखंड में भाजपा सरकार है, जिन्‍हें लालू प्रसाद हरगिज नहीं सुहाते. ऐसे में, तमाम सख्‍ती के लिए जेल मैनुअल के पन्‍ने रोज-रोज पलटे जाते हैं. खैनी खाने के शौकीन लालू प्रसाद की यह तलब दूसरों की खैनी से खत्‍म होती है.

रांची जेल में लालू प्रसाद से अभी कभी भी मुलाकात संभव नहीं है. हफ्ते में एक दिन का समय और वह भी तीन मुलाकातियों के लिए दिया गया है. यह मुलाकात भी दस मिनटों से अधिक की नहीं हो सकती. जेल में लालू प्रसाद जहां रखे गये हैं, वहां टीवी तो जरुर लगा है, पर दूरदर्शन के अलावा और कोई चैनल नहीं आता.

1997-1998 में लालू प्रसाद सेहत से फिट थे. लेकिन अब कई बीमारी है. डायबिटीज के कारण सुगर कंट्रोल में नहीं रहता है. ऐसे में, राबड़ी देवी की यह चिंता गलत नहीं है कि साहेब तो खुद दवा भी नहीं खाते हैं. पर, रांची जेल अभी नियमों को कहीं से भी टस से मस करने के मूड में नहीं दिख रहा है.

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