थानेदार की ताकत कितनी ? जवाब – बेगूसराय में ASP मिथिलेश कुमार से ही बदला ले लिया

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ASP मिथिलेश कुमार (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्‍क : सचमुच, थानेदार से बड़ी ताकत वाला और कोई नहीं होता. यह पुलिस को समझने वाले ठीक से जानते हैं. बेगूसराय में थानेदार ने फिर से ताकत दिखाई. साजिश ऐसी रची कि अपने ही एएसपी मिथिलेश कुमार को फांस दिया. पुलिस महकमे के बड़े अधिकारी भी कंफ्यूज हो गए. मामला दारु का था. दूसरी बात है कि साजिश रचने-गढ़ने के फेर में बेगूसराय मुफस्सिल थाने के इंस्‍पेक्‍टर संजय झा खुद भी सस्‍पेंड हो गए हैं.

बेगूसराय में मुफस्सिल थाना अपने एएसपी मिथिलेश कुमार से खार खाए बैठा था. सबक सिखाने को मौका तलाश रहा था. कारण कि औचक निरीक्षण में एएसपी मिथिलेश कुमार ने पाया था कि थाने की स्‍टेशन डायरी को अपडेट नहीं रखा जाता है. पेंडिंग रखा जाना गलत है. इस बाबत एएसपी ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी.

अब बदले में बेगूसराय के मुफस्सिल थाने ने एएसपी को टारगेट किया. मौका 19 दिसंबर को आया. मुफस्सिल थाने के दारोगा ने शराब के साथ कुछ लोगों को पकड़ा. लाइव सिटीज की पड़ताल में पता चला है कि मुफस्सिल थाने के इस एक्‍शन में शराब के धंधे का असली कारोबारी धीरज नहीं पकड़ा जा सका.

पकड़े गए लोग कौन और कितने वजन के थे, यह अब भी गहन जांच का सब्‍जेक्‍ट है. खैर, खेला शुरु हो चुका था. 19 दिसंबर को एएसपी मिथिलेश कुमार जिले के एसपी के भी चार्ज में थे. गिरफ्तार लोगों के परिजनों ने 20 दिसंबर की सुबह बखेड़ा खड़ा किया. महिलाएं भी आ गईं. कहा जा रहा था कि पकड़े गए लोग शराब के कारोबार से नहीं जुड़े थे. बेवजह पकड़ा गया है. फिर शाम होते-होते शाम को सबों को छोड़ दिया गया.

बंद कहानी 26 दिसंबर को फिर से शुरु हो गई. कहा जाने लगा कि पकड़े गए लोगों को पैसा लेकर छोड़ा गया है. विवाद बढ़ने लगा तो स्‍टेशन डायरी पेंडिंग रखने वाले थाने मुफस्सिल थाने ने 19 दिसंबर की रात को ही साढ़े नौ बजे एएसपी मिथिलेश कुमार को थाने में हाजिर बताया. तभी हिरासत में लिए गए लोग तुरंत के तुरंत लाए गए थे.

साजिश की बुनियाद देखिए. डायरी में लिख दिया गया कि एएसपी मिथिलेश कुमार ने कहा कि सबों की जांच कर ली गई है और बेकसूर हैं, इन्‍हें छोड़ दीजिए. अब माजरे को समझने की जरुरत है कि यदि एएसपी मिथिलेश कुमार जो उस रात को जिले के एसपी के भी चार्ज में हैं, ने तुरंत थाने जाकर सबों को छोड़ने को कहा, तो क्‍या सभी तुरंत नहीं छूट जाते. लेकिन तुरंत कोई नहीं छूटा.

अब सभी 20 दिसंबर 2017 की शाम को छोड़े जाते हैं. खेला इसी से खुलता है. कारण कि एएसपी-प्रभारी एसपी ने जब रात को ही छोड़ने को बोला था, तो फिर 20 घंटे और कैसे सभी थाने में रह गए. फिर यह भी कि यदि थाना इससे सहमत था कि पकड़े गए लोग नहीं छोड़े जाने लायक हैं, तो उन्‍होंने यह रिपोर्ट क्‍यों नहीं की.

पड़ताल में यह बात भी निकली कि पकड़े गए लोगों की आर्थिक हैसियत इतनी नहीं थी कि वे बहुत चढ़ावा चढ़ाते. असली खिलाड़ी तो धीरज है, जो पकड़ा नहीं जा सका. ऐसे में, जब फंसने की बारी आई तो सीधा थाने ने पुराना बंदला साध लिया और एएसपी मिथिलेश कुमार से अपना बदला चुकता कर लिया.

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