बिहार जिसके लिए बदनाम है, वही बताने आ रहे हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणीती चोपड़ा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : ‘बिहार में तीन तरह से जोड़ियां बनती हैं. हिम्मतवालों की अरेंज्ड जोड़ी, किस्मतवालों की लव जोड़ी और दहेज़ के लालचियों की जबरिया जोड़ी.’ यह आनेवाली फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ का एक डायलॉग है, जो फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत के साथ ही सुनने को मिल जाता है. इसी से यह भी आभास हो जाता है कि फिल्म बिहार से जुडी है और एक बड़े मुद्दे को बड़े परदे पर उतारती है. बिहार का यह बड़ा मुद्दा सामान्य भाषा में ‘पकड़ुवा विवाह’ कहा जाता है.

बिहार में ‘पकड़ुवा विवाह’ का यह चलन आज भी बदस्तूर जारी है. खबर लिखे जाने के वक़्त भी हाजीपुर के महुआ में एक ऐसे ही ‘पकड़ुवा विवाह’ की खबर चर्चा में है. इलाके में एक ग्रेजुएशन के छात्र की कथित तौर पर पकड़ कर शादी करा दी गयी है. घटना के सामने आने के बाद आज शनिवार को लड़के के परिजनों ने महुआ थाना पर प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम तक कर दिया. परिजनों ने लड़के का अपहरण किये जाने की रिपोर्ट भी दर्ज करायी है.

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शादी की नीयत से लड़कों के अपहरण का यह कोई अकेला मामला नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस साल 2019 के बीते छह महीने में ही जबरन शादी की नीयत से 1600 से ज्यादा लड़कों के अपहरण के मामले दर्ज हुए हैं. इससे पहले साल 2017 में इसी तरह के 3400 से ज्यादा मामले दर्ज किये गए थे. इसी तरह ‘पकड़ुवा विवाह’ के लिए साल 2016 में 3070, 2015 में 3000 और 2014 में 2526 लड़कों का अपहरण हुआ था. नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के अनुसार बिहार इस मामले में देश भर में नंबर एक स्थान पर है.

आगामी 2 अगस्त को रिलीज़ होने जा रही बॉलीवुड फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ का ट्रेलर देखकर लगता है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा-परिणीती चोपड़ा स्टारर फिल्म इन्हीं मुद्दों के आसपास घूमती है. लेकिन यह फिल्म इस गंभीर मुद्दे को बहुत हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज में दिखाती जान पड़ रही है. इस मुद्दे पर बीते सालों में बनी सबसे चर्चित फिल्म साल 2010 में आयी, सुशील राजपाल निर्देशित ‘अंतर्द्वंद’ रही, जिसे 55वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सामाजिक मुद्दों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवार्ड दिया गया था.

कैसे होता है ‘पकड़ुवा विवाह’?

इस तरह के विवाह की घटनाएं अक्सर वैसे लड़कों के साथ देखने को मिलती है, जिसका परिवार लड़की वालों से ज्यादा दहेज़ की डिमांड करता है. या इस वजह से शादी में रुकावट डालता है. इस स्थिति में दहेज़ दे पाने में अक्षम लड़की के परिवार के लोग मौका देखकर लड़के को जबरन उठा लेते हैं और फिर उसकी शादी करा दी जाती है.’पकड़ुवा विवाह’ की घटनाएं वैसे लड़कों के साथ भी होती हैं, जो अच्छे नौकरीपेशा होते हैं.

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