जीने का जज्बा : बाढ़ व बारिश में जीवन के लिए कहीं रस्सी तो कहीं झोपड़ी का सहारा, जीना इसी का नाम है…

लाइव सिटीज, राजेश ठाकुर : मन में जीने का जज्बा हो तो ​हर कष्ट में राहें निकल आती हैं. जीवन आसान हो जाता है. सारे कष्ट मिट जाते हैं. मॉनसून काल में बाढ़ व बारिश की वजह से तबाही आ गई है. खासकर इससे निचले इलाके तथा नदियों के निकट रहने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं. लेकिन, इन्हीं ​कष्टों के बीच लोगों ने जीने की राह भी निकाल ली है. बाढ़ व बारिश के बीच बिहार में कहीं रस्सी तो कहीं झोपड़ी का सहारा लोगों को मिल रहा है.

सबसे पहले बात करते हैं पूर्वी चंपारण के इलाके का. मोतिहारी के सुगौली में बूढ़ी गंडक धीरे-धीरे अपना विकराल रूप लेती जा रही है. इसका कहर पंचायतों में दिखने लगा है. आधा दर्जन पंचायतों में बाढ़ आ गई है. लोगों का जीना मुहाल हो गया है. वे दहशत में हैं. लेकिन सुगौली में लोगों की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इस संकट की घड़ी में भी राह आसान कर ली है.

बाढ़ पीड़ितों ने रस्सी को अपने जीने का सहारा बना लिया. नदी के इस पार से उस पार जाने के लिए रस्सी की मदद ली. वे अब रस्सी के सहारे अपने आशियाने तक का सफर तय कर रहे हैं. यूं कहें कि बाढ़ से घिरे गांव से निकलने के लिए ग्रामीणों ने एक नायाब तरीका ईजाद कर लिया है. दोनों किनारों पर पेड़ों के सहारे रस्सी को बांध दिया गया है. फिर इसी रस्सी के सहारे लोग अपनी जिंदगी की नैया करे इस पार से उस पार कर रहे हैं.

दूसरी ओर मुजफ्फरपुर में भी कमोबेश यही स्थिति है. यहां लोगों के लिए छत पर बनी झोपड़ी का सहारा है. बागमती नदी की दो धाराओं के बीच बसा है बेनीपुर गांव. आपने साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी का नाम जरूर सुना होगा. इसी बेनीपुर के रहने वाले थे वो. इसलिए उनके नाम में बेनीपुर लगा हुआ है. बेनीपुर में भी हर साल की भांति इस साल भी बाढ़ का कहर शुरू हो गया है. मॉनसून की लगातार हो रही बारिश से गांव के लोग सहमे हुए हैं.

यह पीड़ा केवल बेनीपुर की ही नहीं है. मुजफ्फरपुर के सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित सात प्रखंड के लोगों की यह पीड़ा है. उन्हें न सरकार के आश्वासन पर भरोसा है और न ही जनप्रतिनिधियों पर विश्वास. बेनीपुर की तरह ही औराई, कटरा, गायघाट, बंदरा, बोचहां, मीनापुर तथा मुरौल के लोग भी डरे हुए हैं और अपनी-अपनी तैयारी कर रहे हैं. अभी से गांवों में वे लोग पक्के के मकान की छत पर झोपड़ी बना रहे हैं. छोटी-छोटी नाव तैयार करा रहे हैं, ताकि बाढ़ के दौरान उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो.

लोगों की मानें तो इस बार समय से पहले बाढ़ आ गई है. बाढ़ की वजह से लोगों को ढाई से तीन माह तक परेशानी होने वाली है. ग्राउंड फ्लोर में पानी घुस जाने से सामान के भी बर्बाद होने का खतरा बना रहता है. ऐसे में लोग छत पर झोपड़ी बनाकर उसी में रहेंगे. लेकिन वैसे लोगों को काफी परेशानी हो रही है, जिनके घर पक्के के नहीं हैं. वैसे लोग भगवान के भरोसे हैं.