राजकीय प्रतीक चिन्ह डूब रहा बाढ़ के पानी में, सरकार उदासीन

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : उत्तर बिहार बाढ़ एक बार फिर बाढ़ के पानी में डूब रहा है. हिमालय के तराई इलाके में हुई भारी बारिश की वजह से सभी नदियां उफनाई हैं और उनका पानी बिहार के पश्चिमी और पूर्वी कोने में तेजी से फैल रहा है. यह जल प्रलय इलाके के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण धरोहरों तक को डुबो रहा है मगर उनकी रक्षा के प्रति सरकार पूरी तरह गाफिल है.

और तो और भारत का राजकीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ भी पानी के आगोश में है. चंपारण स्थित लौरिया का अशोक स्तंभ डेढ़ से दो फीट पानी में डूबा हुआ है मगर उसकी सुरक्षा से किसी को मानो कोई सरोकार ही नहीं है.




बता दें कि अशोक स्तंभ को दुनिया के सबसे महान सम्राटों में से एक सम्राट अशोक ने आज से 2250 साल पहले वहां खुदवाया था और वहां भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण की कथा उत्कीर्ण करवायी थी. अशोक स्तंभ इतना पुराना और महत्वपूर्ण प्रतीक चिन्ह है कि महज इस एक चिन्ह को सजा संवार कर रखने से और ठीक से प्रचारित करने से यहां पर्यटकों का मेला लगने लगता है.

पर्यटकों के आने से इस इलाके के लोगों की आमदनी में इजाफा होता है. आज यह प्रतीक चिन्ह पानी में डूबा मौसम के प्रकोप को झेलना रहा है, सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा है . इसकी नियति है. यह स्तंभ 2250 साल बाद भी पूरी मजबूती से खड़ा है, वेगवती लहरें भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रहीं.