हड़ताली शिक्षकों ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र, लिखा- सरकार की बेरुखी से शिक्षक दोहरे संकट में हैं

पटना:  बिहार में सार्वजनिक शिक्षा के केंद्र विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता बहाल करने एवं वहां कार्यरत नियोजित शिक्षकों के सम्मानपूर्वक जीवनयापन हेतु सहायक शिक्षक- राज्यकर्मी का दर्जा एवं पूर्ण वेतनमान व सेवाशर्त की मांग पर चार लाख से भी अधिक शिक्षक विगत 17 फरवरी से ही हड़ताल पर हैं.

इस बीच पूरा विश्व कोरोना वायरस की वजह से आपदा की चपेट में आ गया है जिसका प्रभाव भारत में भी दिखने लगा है. केंद्र सरकार ने इस स्थिति में गंभीरतापूर्वक हस्तक्षेप करते हुए पहले जनता कर्फ्यू और फिर 21 दिनों के स्थायी लाकडाउन जैसे जरुरी कदम उठाये हैं.



सूबे के हड़ताली शिक्षकों ने भी जनता कर्फ्यू से पूर्व यथासंभव सुरक्षा के साथ जागरूकता अभियान चलाया है. हड़ताल में बने रहने के बावजूद शिक्षक कोरोना आपदा में टास्क फोर्स का हिस्सा बनकर अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं.

बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति कोर टीम के सदस्य और टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक एवं प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा कि हड़ताली शिक्षक बार बार मुख्यमंत्री महोदय से मसले पर संज्ञान लेने की गुहार लगा रहे हैं.

राज्यसरकार इस मसले पर चुप है. सरकार शिक्षकों के हड़ताल से पूर्व के लंबित वेतन भुगतान पर भी रोक लगा दी है. शिक्षकों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. एक तरफ कोरोना का खतरा दूसरी तरफ वेतनबंदी से सूबे के लाखों शिक्षक परिवार भयाक्रांत स्थिति में जीने को अभिशप्त हैं. शिक्षकों को न्यायोचित आश्वासन देकर हड़ताल समाप्त कराते हुए सघन आपदा टीम बनाने के बदले राज्य सरकार द्वारा लगातार शिक्षकों को दण्डित करने सम्बन्धी आदेश जारी किये जा रहे हैं.

बिहार के शिक्षक परिवारों ने इस परिस्थिति में महामहिम राष्ट्रपति को अपना त्राहिमाम संदेश भेजकर कोरोना संकट और वेतनबंदी से बिहार के चार लाख शिक्षक परिवारों के प्राणरक्षा की गुहार लगाई है.

संगठन के प्रदेश सचिव अमित कुमार, शाकिर इमाम, नाजिर हुसैन, कोषाध्यक्ष संजीत पटेल और प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल विकास ने कहा कि अपने ही शिक्षकों के प्रति सरकार का उपेक्षापूर्ण व्यवहार चिंताजनक है. नियोजित शिक्षक न केवल शिक्षण बल्कि राज्यसरकार के दर्जनों विभागों के काम को बढ़चढ़ कर करते रहें.

नियोजित शिक्षकों से बैल की तरह तमाम तरह के शैक्षणिक- गैरशैक्षणिक काम करानेवाली सरकार इस आपदा की घड़ी में उनको भूखों मरने को छोड़ रही है. बिहार के लाखों शिक्षक परिवार सरकार के इस रवैये से बेहद आहत हैं. सरकार की चरम संवेदनशुन्यता के खिलाफ शिक्षक हड़ताल में बने रहने को विवश हैं. नियोजित शिक्षक अंतिम दम तक हड़ताल में बने रहते हुए कोरोना महामारी के खिलाफ अपने सामाजिक दायित्व का पालन करते रहेंगे.