बालू मामला : अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार सरकार को दिया झटका

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पटना : बिहार सरकार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. इस बार सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की नई बालू नीति को लेकर पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है. पटना हाईकोर्ट ने बीते माह बिहार सरकार के ‘बिहार लघु खनिज नियमावली, 2017’ पर रोक लगा दिया था. बिहार सरकार द्वारा राज्य में अवैध खनन और माफ़िया का इस कारोबार में वर्चस्व ख़त्म करने के लिए इसे बनाया गया था. लेकिन कई पक्षों ने नए नियमावली में ख़ामियों को उजागर किया था.

पटना हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ही बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसके बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के बालू, गिट्टी और मिट्टी के खनन, बिक्री और परिवहन के लिए बनाए गए नई नियमों पर रोक लगा दी थी. साथ ही कोर्ट ने पुराने नियमों के तहत काम करने का आदेश दिया था.



क्या है मामला    

बता दें कि बिहार में अवैध बालू खनन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इस साल नए नियम बनाएं और इसे 10 अक्टूबर 2017 को बिहार गजट में प्रकाशित किया था. बिहार सरकार ने 14 नवंबर को बालू-गिट्टी का रेट भी जारी किया था. इस नये नियम का खनन कंपनियां और ट्रांसपोर्टर विरोध कर रहे हैं. इससे राज्य में बालू संकट बना हुआ था और इसी बात को लेकर पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने ताजा निर्णय सोमवार 11 दिसंबर को दिया था. पटना हाईकोर्ट ने खनन विभाग द्वारा 27 दिसंबर के बाद जारी सभी आदेशों पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने साथ ही खनन विभाग के प्रधान सचिव के के पाठक को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा था कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अदालती अवमानना का मामला चलाया जाए. कोर्ट इस बात से खफा थी कि उसके द्वारा बीते 27  नवंबर को बिहार सरकार के नए बालू कानून पर रोक लगाए जाने के बावजूद क्यों उससे संबंधित आदेश पारित किये गए.

इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि खनन संबंधी सभी आदेश और कार्य असंशोधित कानून के अनुसार ही फिलहाल जारी रहेगा. बालू पर पटना हाईकोर्ट में अब अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी.