सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, दागी नेताओं के मामले निपटाने को हर जिले में बनेंगे स्पेशल सेशन कोर्ट

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फाइल फोटो

लाइव सिटीज, (के.के झा): दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर सभी जिलों में एक स्पेशल सेशन कोर्ट बनाने की का आदेश दिया है. हालाकि आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश फिलहाल बिहार और केरल के लिए आया है.

बिहार और केरल के हर जिले में बनेंगे सेशन कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए बिहार और केरल के हाईकोर्ट को राज्यों के सभी जिलों में सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए सेशन और मजिस्ट्रेट कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इन सेशन कोर्ट से सांसदों और विधायकों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने का भी निर्देश जारी किया है. आपको बता दें कि एक साल के अंदर इन सेशन कोर्टों में दागी विधायकों और सांसदों के लंबित मामलो का तेजी से निपटारा किया जाएगा.

राजनेताओं के खिलाफ कुल 4122 आपराधिक मामले में लंबित

इससे पहले एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में बताया था कि देश भर में दागी नेताओं के खिलाफ कुल 4122 आपराधिक मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं.एमीकस क्यूरी के विजय हंसरिया और स्नेहा कलिता ने राज्यों और हाई कोर्ट से प्राप्त आंकड़ों के आधार रिपोर्ट को जारी किया था. इसमें कहा गया है कि राजनेताओं के खिलाफ कुल 4122 आपराधिक मामले में लंबित हैं. वहीं, 1991 मामले ऐसे हैं जिनमें आरोप तय नहीं हुए हैं और 264 मामले ऐसे हैं जिनके ट्रायल पर हाई कोर्ट द्वारा रोक लगाई गई है.

आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई की है. इससे पहले कोर्ट ने राज्यों और हाइकोर्ट से विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर विस्तृत आंकड़े मंगाए थे. ताकि इन मामलों में जल्द ट्रायल पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को लेकर सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिए जा सकें. बता दें कि दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में चार्जशीट के आधार पर चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

देश में कितनी है दागी नेताओं की संख्या?

चुनाव सुधार के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) की तरफ से देश के कुल 4896 जन प्रतिनिधियों में से 4852 के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया गया. जिसमें कुल 776 सांसदों में से 774 और 4120 विधायकों में से 4078 विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण शामिल है.

ADR की इस रिपोर्ट में 33 फीसदी यानी 1581 जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से सांसदों की संख्या 98 है जबकि 35 लोगों पर बलात्कार, हत्या और अपहरण जैसे संगीन आरोप हैं.

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