तेजस्वी यादव : सोशल मीडिया पर लाइक-कमेंट-शेयर से काम नहीं चलेगा, झंडा उठाना पड़ेगा

लाइव सिटिज, पटना से देवांशु प्रभात : पटना के अंबेडकर छात्रावास में सावित्री बाई फुले जयंती समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, आरजेडी नेता अनिल साधू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष अमर आजाद समेत कई लोगों ने शिरकत किया. समारोह में बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि आरक्षण कोई आमदनी बढ़ाओ, इंदिरा आवास और मनरेगा योजना नहीं है. आरक्षण एकदम अलग चीज है. और बड़े चालाकी के साथ केंद्र सरकार ने इसे आर्थिक रूप से लागू कर दिया.

तेजस्वी ने कहा कि हमारी मांग है कि नये सिरे से जाति की जनगणा की जाए. फिर जिसकी जितनी आबादी है, उसको उतना आरक्षण दिया जाए. लेकिन केंद्र सरकार ये काम नहीं करेगी. क्योंकि ये लोग जानते हैं कि कौन लोग ठेला लगाते हैं, कौन रिक्शा चलाता है, कौन दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, कौन लोग गंदगी साफ करते हैं, कौन लोग किसानी करते हैं और कौन नाला साफ करता है. आगे वीडियो में देखें तेजस्वी यादव का बयान…

उन्होंने कहा – मेरा मानना है कि जबतक आरक्षण नहीं बढ़ेगा, तब तक आपको रोजगार नहीं मिलेगा. अब सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट और शेयर से ही काम नहीं चलेगा. अब आप लोगों को झंडा उठाना पड़ेगा. सड़कों पर आना पड़ेगा. आरक्षण के मुद्दे को लेकर हम संघर्ष कर रहे हैं, तो आप हमलोगों के हाथों को मजबूत करें.

तेजस्वी ने कहा कि मेरे चाचा नीतीश कुमार ने बार-बार पलटी मारकर बिहार का बंटाधार कर दिया है. कहने को तो बिहार में डबल इंजन की सरकार है, तो पूछिए कि बिहार के विशेष राज्य के दर्जे का क्या हुआ. चाचा नीतीश कुमार बीजेपी के शरण में इसलिए गए क्योंकि उनको सृजन घोटाले में डर था. जो गलती करता है वो ही शरण में जाता है. हम लोग इमानदार हैं, इसलिए लड़ाई लड़ रहे हैं. पलटूराम को भगाओ और बिहार को बचाओ.

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अमर आजाद और तेजस्वी यादव

तेजस्वी ने कहा कि अगर मेरे मन में कुर्सी का लालच होता, तो बीजेपी वाले से साथ मिला लेते. फिर आज हम बिहार के मुख्यमंत्री होते. ऐसे में हम 100 बार मुख्यमंत्री पद को लात मारने का काम करेंगे. लेकिन हम समझौता नहीं करेंगे. पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए गोली भी खाली पड़े तो हम सबसे आगे रहेंगे. केंद्र में जो मनुवादी लोग हैं, उन्हें सत्ता से बेदखल करना है.

उन्होंने कहा – एक बात समझ लीजिए, क्या पता दुबारा देश में चुनाव हो न हो. ये आखिरी बार ही सोच लीजिए कि आप लोगों को वोट देने का मौका मिल रहा है. जो संविधान को नहीं मानता है, क्या पता आगे कह दें कि अब वोट देने की जरूरत नहीं है.

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