कार्रवाई के नाम पर आंख में धूल मत झोंकिये नीतीश कुमार : तेजस्वी यादव

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला है. राजधानी पटना में जलजमाव को लेकर नीतीश सरकार को तेजस्वी ने घेरा है. तेजस्वी ने कहा, “आदरणीय नीतीश कुमार जी आँख में धूल झोंकने के माहिर खिलाड़ी हैं. हर छोटी मोटी उपलब्धि का श्रेय स्वयं हड़पते हैं पर विकराल नाकामियों का ठीकरा छोटे-छोटे किराना कर्मचारियों पर फोड़ते हैं.”

तेजस्वी यादव ने फेसबुक पोस्ट कर कहा कि अबकी बार उन्होंने पटना के जल जमाव का ठीकरा अभियन्ताओं के मत्थे फोड़ दिया है. जैसे इतने बड़े स्तर पर कुप्रबन्धन का सारा दोष इन 6 कर्मचारियों की बदौलत ही हुआ हो. कल तक तो मुख्यमंत्री जल जमाव का दोष हथिया नक्षत्र, तारों, ग्रहों, प्रकृति, विपक्ष और ना जाने किस-किस को दे रहे थे तो आज इन छोटे स्तर के कर्मचारियों को शो कोज़ नोटिस क्यों जारी किया जा रहा है? जब दोष नक्षत्र, प्रकृति और ग्रहों का है तो गाज इंजीनियरों पर गिराने का ढोंग क्यों किया जा रहा है? मतलब मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि विपक्ष का बड़े स्तर पर हुए कुप्रबंधन और लापरवाही का आरोप शत-प्रतिशत सही है. और जब मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी सिर्फ 6 कर्मचारियों की?



“शुक्र है मुख्यमंत्री ने आख़िरकार हमारी बात को स्वीकारा कि यह बाढ़ नहीं सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार जनित जलजमाव था. मुख्यमंत्री वास्तविकता और ज़मीनी सच्चाई से कट गए है इसलिए उन्हें जो कुछ इनके भ्रष्ट अधिकारी पढ़ा देते है. ये बोल देते है क्योंकि यही भ्रष्ट अधिकारी इनकी पार्टी के लिए फ़ंड इकट्ठा करते है.”

“मुख्यमंत्री बतायें कि क्या ये इंजीनियर जल जमाव, नाला, सीवर, नमामि गंगे और ड्रेनिज संबंधित डिसिज़न और पॉलिसी मेकिंग प्रक्रिया का हिस्सा थे? सारी नीतियाँ आप और आपके दुलारे बड़े भ्रष्ट अधिकारी बनाते है और कारण आप छोटे कर्मचारियों से पूछ रहे है?

” बड़े अफसरों, इनके चुनिंदा मंत्रियों और इनकी खुद की तो कोई जैसे जिम्मेदारी बनती ही नहीं है. BUDCO के इंजीनियरों का तो मात्र साल-डेढ़ साल में तबादला हो जाता है. बड़े-बड़े अफसर लम्बे समय तक एक ही विभाग पर एकछत्र राज स्थापित किए रहते हैं परंतु वो नीतीश मार्का “सुशासन” में हर उत्तरदायित्व से अछूते रहते हैं.”

“आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और नगर विकास मंत्री का काम क्या बस मुख्यमंत्री की शान में चापलूसी के कसीदे पढ़ना है? खुद मुख्यमंत्री स्वयं को 14 साल से तथाकथित सुशासन के नाम पर चल रहे बंदरबांट और कुप्रबंधन के स्वघोषित कर्ता धर्ता समझते हैं लेकिन उनकी कोई जिम्मेदारी है कि नहीं? जनता को हर वर्ष इतनी बड़ी-बड़ी मानव निर्मित आपदाओं और कुप्रबन्धन के गटर में धकेलने वाले तथाकथित विकास पुरूष की कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं है? क्या मेयर, कमिश्नर और मंत्री की कोई जवाबदेही नहीं?”

“जब विपक्ष और मीडिया ने बिहार में हर वर्ष हो रहे जलजमाव पर तीखे सवाल दागे तो बौखलाए मुख्यमंत्री मुंबई से लेकर अमेरिका का अनर्गल प्रलाप करने लगे. इनके सुशासनी सांसद, विधायक और केंद्रीय व राज्य सरकार के मंत्री नक्षत्रों पर विधवा विलाप करने लगे. सत्ता इन्हें हर सुख, भोग-विलास दे, बस जिम्मेदारी ना दे. जिम्मेदारी तो ये बस अपने कुतर्क से विपक्ष और पीड़ित जनता की ही ढूंढ लाएँगे.”

“नीतीश जी ने इतने व्यापक कुप्रबंधन व लापरवाही के लिए मुट्ठी भर इंजीनियरों को “शो कॉज” किया है, पर जनता ने इन्हें जो “सो कॉज” किया है उस पर क्यों चुप्पी साधे हैं? अंतरात्मा बाबू, आप जो 14 साल से “सो” रहे थे उस “सो कॉज” पर भी कुछ बोलें.”

“नीतीश जी, आपकी अगुवाई में कथित सुशासन की रहनुमाई करने वाले एवं आपकी पार्टी के फ़ंड जुटाने वाले सारे भ्रष्ट अधिकारी तो आपके मुकुट मणि है. उनपर कारवाई का मतलब है स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना. अब आप पूर्णतः एक्स्पोज हो चुके है. आपके उपमुख्यमंत्री किस हैसियत से नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक करते थे? क्या उनका कोई दोष नहीं है?

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