Caste Census : जातीय जनगणना पर तेजस्वी का ‘लेटर बम’; 33 दिग्गजों में नीतीश, मांझी, चिराग व मुकेश सहनी को भी भेजी चिट्ठी

लाइव सिटीज, राजेश ठाकुर : बिहार में जातीय जनगणना पर सियासत तेज है. केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में इनकार के बाद अब बिहार महागठबंधन में शामिल आरजेडी कोई भी मौका गंवाना नहीं चाह रहा है. आरजेडी प्रमुख लालू यादव जहां सोशल मीडिया पर हमला कर रहे हैं, वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंदोलन को असलीजामा पहनाने के लिए जमीन तैयार करने में जुट गए हैं.

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को इसी क्रम में जातीय जनगणना को लेकर सियासी गलियारे में ‘लेटर बम’ भेजा है. उन्होंने इस मुद्दे को देशव्यापी बनाने के लिए कमर कस ली है. उन्होंने देश के ​33 दिग्गज नेताओं को जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने का आह्वान किया है. उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी दी है.

तेजस्वी यादव ने इसकी जानकारी देते हुए लिखा है कि सामाजिक-आर्थिक और जातीय जनगणना की मांग को लेकर देश की विभिन्न पार्टियों के 33 वरिष्ठ नेताओं को केंद्र सरकार के उदासीन एवं नकारात्मक रवैये तथा सबकी सांझा आशंकाओं और जिम्मेदारियों के संदर्भ में उन्होंने पत्र लिखा है. उन्होंने आगे लिखा है कि जाति आधारित जनगणना की मांग को राष्ट्र निर्माण में एक आवश्यक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए. जातीय जनगणना नहीं कराने के खिलाफ सत्ताधारी दल के पास एक भी तर्कसंगत कारण नहीं है.

खास बात कि 33 लोगों में जहां सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, भूपेश बघेल, हेमंत सोरेन, ओमप्रकाश चौटाला, मुफ्ती मोहम्मद, चंद्रजीत सिंह चन्नी समेत विपक्ष के तमाम वरीय नेता शामिल हैं. वहीं, तेजस्वी यादव ने बिहार के भी कई दिग्गज नेताओं को यह पत्र भेजा हैं. इसमें बीजेपी को छोड़ एनडीए के तमाम घटक दलों के नेता शामिल हैं. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, हम पार्टी के मुखिया जीतनराम मांझी, वीआइपी पार्टी के मुखिया व मंत्री मुकेश सहनी तथा लोजपा सांसद चिराग पासवान को भी पत्र भेजा है.

यहां पढ़ें तेजस्वी यादव का पूरा पत्र

गौरतलब है कि जातीय जनगणन को लेकर केंद्र सरकार ने दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. हलफनामा दायर कर केंद्र ने कह दिया है कि वह पिछड़ा व अतिपिछड़ा की गणना नहीं करा सकते हैं. इसमें काफी समस्या है. यह भी बताया गया है कि केंद्र ने यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया है. बता दें कि पिछले माह जातीय जनगणना कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला था. इस प्रतिनिधिमंडल में तेजस्वी यादव, मदन मोहन मांझी, जीतनराम मांझी, मुकेश सहनी समेत 11 लोग शामिल थे. प्रधानमंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया था. इसी बीच केंद्र के हलफनामे ने बिहार के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है. इस पर जेडीयू के नेता संभल-संभलकर बयान दे रहे हैं, जबकि बिहार के बीजेपी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय के साथ हैं. हालांकि, कल बीजेपी के मंत्री जनक राम ने कहा कि प्रधानमंत्री का फैसला अभी नहीं आया है, सो विपक्ष को थोड़ा इंतजार करना चाहिए.

बहरहाल, आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने कल भी ट्वीट कर केंद्र पर हमला किया तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आनन-फानन में महागठबंधन नेताओं की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तीन दिनों की मोहलत दी है. महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि तीन दिनों के अंदर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर स्थिति स्पष्ट करें. हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं. वे कल नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यिमंत्रियों की होने वाली बैठक में शामिल होंगे. इस बैठक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि तीन दिनों के बाद तेजस्वी यादव का एक्शन प्लान क्या होगा?