महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि का बड़ा बयान, हर मंगलवार कयामत आती थी मुजफ्फरपुर बालिका गृह में

लाइव सिटीज डेस्क : मुजफ्फरपुर बालिका गृह में रह रहीं बच्चियों के यौन शोषण व रेप का मामला इन दिनों पूरे बिहार को शर्मसार किये हुए है. बिहार विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में यह मामला छाया हुआ है. हालांकि इस पर केंद्र सीबीआई जांच कराने को तैयार है, लेकिन बिहार सरकार ने बिहार पुलिस की जांच को ही पर्याप्त बताया है. इसी मामले में बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने खुद ही संज्ञान लिया. वहीं अब महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि देवी का बड़ा बयान आ गया है. उन्होंने एक चैनल से बात करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के लिए हर मंगलवार की रात कयामत की रात होती थी.

गौरतलब है कि महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि देवी के नेतृत्व में एक टीम दिनों मुजफ्फरपुर पहुंची. उनके साथ एसपी, डीएसपी समेत मुजफ्फरपुर के कई सीनियर अधिकारी मौजूद रहे. दौरा करने के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि बालिका गृह में लड़कियों के लिए हर मंगलवार की रात कयामत की रात होती थी. उस कयामत की रात में जांच के लिए अफसर पहुंचते थे. वे लड़कियों को अपने साथ ले जाते थे और बाद में उन्हें यहां पहुंचा देते थे.

अध्यक्ष दिलमणि देवी ने बताया कि महिला आयोग की टीम निरीक्षण के बाद स्तब्ध रह गयी. बालिका गृह का चप्पा-चप्पा निरीक्षण किया. एक-एक कमरे को खंगाला. उन्हीं कमरों में बच्चियां रहती थीं. कमरे काफी डरावने थे. अंदर से बाहर निकलने के ​भी कई रास्ते हैं, जिससे अंदर के लोगों को भी पता नहीं चलेगा कि कौन आया और कौन गया. तीसरी मंजिल से भी बाहर निकलने की एक सीढ़ी थी. उन्होंने यह भी कहा कि यह घर इसी इरादे से बनवाया गया था कि कहीं से भी आसानी से बाहर निकला जा सकता है.

उन्होंने और भी कई खुलासे किये हैं. उन्होंने कहा कि घर के अंदर की स्थिति से पता चलता है कि वहां जरूर कोई गड़बड़ है. गलत काम हो रहा होगा. घर के एक कमरे में एक बेड लगा था, जहां मेडिकल के कई सामान रखे हुए थे. सबसे बड़ी बात कि यहां लड़कियों का गर्भपात कराने की भी व्यवस्था थी. उन्होंने कहा कि लड़कियों ने भी बताया कि उन्हें रात में सोने की दवा दी जाती थी. दवा खाने के बाद वे गहरी बेहोशी की हालत में चली जाती थीं. सुबह उठने पर पेट में और बदन में बहुत दर्द होने की शिकायत करती थीं. बाद में उन्हें दर्द होने की शिकायत किये जाने पर दर्द की दवा दी जाती थी. बालिका गृह में तहखाने और गुप्त रास्ते भी मिले हैं.

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