Pappu Yadav News : पहला वारंट रास्ते में गिरा, सात माह बाद दूसरा मिला… तब कोर्ट ने एसपी को कहा ‘विद्वान’

लाइव सिटीज, पटना : जाप सुप्रीमो पप्पू यादव अभी बिहार के सियासी गलियारे में सुर्खियों में हैं. उन्हें 11 मई की सुबह पटना पुलिस ने लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार किया था. उसी दिन शाम में मधेपुरा पुलिस ने अपहरण के मामले में पप्पू यादव को अपने कब्जे में ले लिया था. उन्हें वीरपुर जेल में रखा था. कोर्ट के आदेश के बाद अब उन्हें डीएमसीएच ले जाया गया, लेकिन इस मामले में रोचक पहलू यह है कि कोर्ट का वारंट पहली रास्ते में गिर गया था, इसलिए कोर्ट को दूसरी बार वारंट जारी करना पड़ा.

दरअसल, जाप सुप्रीमो पप्पू यादव को 32 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है. यह केस 29 जनवरी 1989 को रामकुमार यादव के चचेरे भाई शैलेंद्र यादव ने दर्ज कराई थी. चूंकि एमपी-एमएलए से संबंधित केसों की सुनवाई एसीजेएम-फर्स्ट के कोर्ट में होती है. ऐसे में पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज इस केस की सुनवाई भी एसीजेएम-फर्स्ट के कोर्ट में हो रही है. इस केस में बेल टूटने के बाद कोर्ट की ओर से पिछले साल 10 फरवरी को गैर जमानती धाराओं में पप्पू यादव के खिलाफ वारंट जारी किया गया.

यह वारंट मधेपुरा एसपी कार्यालय पहुंचा. वहां से कुमारखंड थाने को डिस्पैच किया गया. लेकिन, वारंट थाने को तामिल नहीं कराया जा सका. इस पर पिछले साल ही 19 सितंबर को कुमारखंड थानेदार सियावर मंडल ने कोर्ट से वारंट की दूसरी कॉपी जारी करने का आग्रह किया. इसमें बताया गया कि चौकीदार संजीव कुमार वारंट लेकर एसपी कार्यालय से चला, लेकिन वारंट रास्ते में ही कहीं गिर गया. थानेदार को वारंट मिला ही नहीं. इस पर कोर्ट ने दूसरी कॉपी जारी करने के बजाय पुराने वारंट को रद्द कर दिया और दोबारा वारंट जारी किया. साथ ही इसमें टिप्पणी भी की गई.

सूत्रों के अनुसार, कोर्ट ने अपने कार्यालय को आदेश दिया कि ‘विद्वान’ एसपी को वारंट इंड्यूस किया जाए. साथ ही एसपी को निर्देश दिया कि इस वारंट को अविलंब तामिल कराएं. इसके बाद भी वारंट पर होने वाली कार्रवाई कागजी प्रक्रियाओं में ही है. यह भी सच है कि यदि पप्पू यादव की गिरफ्तारी का मामला सामने नहीं आता तो शायद अपहरण का यह मामला सामने नहीं आता. खास बात कि 19 सितंबर को जब दोबारा वारंट जारी किया गया, इसके बाद भी पुलिस पप्पू यादव को गिरफ्तार नहीं कर पाई. तब उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया गया. यह अभी प्रक्रिया में ही है.