‘तानाशाही’ की सरकार को इस शख्स ने जड़ से हिला डाला, कुछ ऐसी थी जेपी की शख्सियत

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: भारत के इतिहास में आज का दिन खास है. आज यानी 11 अक्टूबर को ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ. 1902 में सिताबदियारा में जन्मे जेपी ने देश में क्रांति की लॉ जलाई. संपूर्ण क्रांति का आंदोलन छेड़कर जेपी ने सरकार को जड़ से उखाड़कर फेंक डाला और नारा था कि सिंहासन खाली करो कि जनता आती है. कुछ ऐसी थी जेपी की शख्सियत.

जयप्रकाश नारायण एक ऐसे जननायक थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई से लेकर साल 1977 तक के तमाम आंदोलनों में सबसे आगे रहकर मशाल थामा. उन्होंने दर्शन और व्यक्तित्व से देश की दिशा तय कर दी थी. आपातकाल के जंजीरों से जेपी ने देश को मुक्त कराने की जिद ठानी. लाखों की तादाद में समर्थक जेपी के विचार पर चलते रहे. देखते-देखते आंदोलन उग्र हुआ और यह संपूर्ण क्रांति जेपी की कल्पना से भी उपर हुआ. जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार गिरा डाली.



दरअसल देश उन दिनों इंदिरा गांधी की नीतियों के खिलाफ था. तब पटना में छात्रों ने आंदोलन छेड़ा गया. जिसकी अगुवाई जेपी कर रहे थे. जेपी शांतिपूर्ण आंदोलन में विश्वास रखते थे. इंदिरा सरकार ने खुद के खिलाफ माहौल देखकर देश में आपातकाल का ऐलान कर दिया. जिसके बाद तमाम नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया. लेकिन जेपी इनसे अलग थे. उन्होंने छात्र आंदोलन का सहारा लेकर इंदिरा की सरकार हिला डाली. हालांकि इस दौरान सभी नेताओं की तरह जेपी भी जेल में बंद कर दिए गए.

सात महीनों तक जेपी ने जेल में समय काटा. इस दौरान उनकी तबीयत भी खराब हुई. लेकिन आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा था. आखिरकार इंदिरा सरकार को आपातकाल हटाना पड़ा. इसके बाद फिर से चुनाव हुआ. जिसमें इंदिरा गांधी की बुरी हार हुई. यहां तक कि उनके बेटे संजय गांधी को भी चुनाव में बुरी तरह शिकस्त मिली.

जेपी की इस लड़ाई ने देश में एक बार फिर से लोकतंत्र की नींव रख दी. हालांकि दिल की बीमारी के कारण 8 अक्टूबर 1979 को जेपी का निधन हो गया. जिससे पूरा देश मायूस हो गया. साल 1999 में जेपी को सर्वोच्च नागरिक के सम्मान से नवाजा गया.