नवनिर्मित कोसी महासेतु पर चली ट्रायल ट्रेन, उत्तरी बिहार के लोगों के 90 वर्षों का सपना जल्द होगा पूरा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पूर्व मध्य रेल की ओर से नवनिर्मित कोसी महासेतु पर ट्रायल ट्रेन चलाया गया. ट्रायल ट्रेन के सफलतापूर्वक संचालन के बाद उत्तरी बिहार के लोगों का 90 साल पुराना सपना पूरा होने समय आ गया.

  पूर्व मध्य रेलवे की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार लगभग 1.9 किलोमीटर लंबे नए कोसी महासेतु सहित 22 किलोमीटर लंबे निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण वर्ष 2003-04 में रू. 323.41 करोड़ की लागत से स्वीकृत किया गया था. इसके उपरांत दिनांक 06.06.2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शिलान्यास किया गया था. 



कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूर्व मध्य रेल सभी स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए परियोजना को अंतिम रूप देने हेतु लगातार कार्यरत है. जल्द ही कार्य पूरा कर कोसी महासेतु सहित निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया जाएगा.

कोसी नदी संपूर्ण बिहार प्रदेश को ही नहीं अपितु समग्र भारत और नेपाल की प्रमुख नदियों में अन्यतम मानी जाती है. यह बराह क्षेत्र, कुसहा तथा चतरा स्थानों से होते हुए बिहार की सीमा पर सहरसा जिले के बीरपुर और भीमनगर स्थानों पर आती है.

 वर्तमान पुल का निर्माण निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच किया गया है. निर्मली जहां दरभंगा-सकरी-झंझारपुर मीटर गेज लाइन पर अवस्थित एक टर्मिनल स्टेशन था वहीं सरायगढ़, सहरसा और फारबिसगंज मीटर गेज रेलखंड पर अवस्थित था. सन 1887 में बंगाल नॉर्थ-वेस्ट रेलवे ने निर्मली और सरायगढ़ (भपटियाही) के बीच एक मीटर गेज रेल लाइन का निर्माण किया था. उस समय कोसी नदी का बहाव इन दोनों स्टेशनों के मध्य नहीं था. उस समय कोसी की एक सहायक नदी तिलयु्गा इन स्टेशनों के मध्य बहती थी जिसके ऊपर लगभग 250 फीट लंबा एक पुल था.

कोसी की मनमानी धाराओं को नियंत्रित करने का सफल प्रयास पश्चिमी और पूर्वी तटबंध तथा बैराज निर्माण के साथ 1955 में आरंभ हुआ. पूर्वी और पश्चिमी छोर पर 120 किलोमीटर का तटबंध 1959 में पूरा कर लिया गया और 1963 में भीमनगर में बैराज का निर्माण भी पूरा कर लिया गया. इन तटबंधों तथा बैराज ने कोसी नदी के अनियंत्रित विस्थापन को संयमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसके कारण इस नदी पर पुल बनाने की परियोजना सकार रूप ले सकी.

निर्मली से सरायगढ़ तक का सफर वर्तमान मे दरभंगा-समस्तीपुर-खगड़िया -मानसी-सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर का है. इस पुल के निर्माण से यह 298 किलोमीटर की दूरी मात्र 22 किलोमीटर में सिमट जाएगी.