याद किए गए महावीर प्रसाद माधव, बेतिया के कार्यक्रम में साहित्यकारों ने किया माल्यार्पण

बेतिया: साहित्यकार महावीर प्रसाद माधव पुण्यतिथि पर याद किए गए. बेतिया के नरकटियागंज में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया और उनकी रचनाओं पर चर्चा की. कार्यक्रम में उन्हें याद करते हुए उनके पुत्र राजीव रंजन सुधांशु काफी भावुक हो गए. वे अपने बचपन के दिनों को भी याद किया और कहा कि पिताजी कभी डांटे नहीं.

बता दें कि महावीर प्रसाद माधव का जन्म 23 मार्च को 1923 को हुआ था. उनका जन्म मुंगेर के हवेली खड़गपुर स्थित बड़ी मझगांव में हुआ था. उन्हें बिहार सरकार ने वयोवृद्ध साहित्य सम्मान पुरस्कार 2010, से नवाजा गया था. इसके अलावा बाबा भीम साहब अंबेडकर फेलोशिप, विद्या वाचस्पति, काव्य भूषण सम्मानित, प्रशस्ति, अभिनंदन साहित्य पुरस्कार आदि से भी उन्हें सम्मानित किया गया था. वे अपनी जीवन में करीब 45 पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित भी हुईं.



‘अभियंजना’ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था पटना के कार्यकारिणी अध्यक्ष द्वारा मुझे श्री महावीर प्रसाद सिंह ‘माधव ‘ के बारे में कुछ लिखने को कहा गया तो मैं सोच नहीं पा रहा था कि क्या लिखूं, कैसे लिखूं. ‘माधव’ मेरे बाबूजी हैं, मैं चार भाई- बहनों में सबसे छोटा संतान हूं. इनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को सबसे नजदीक से देखने का मौका मुझे मिला है. मुझे याद है मेरा बचपन का वह दिन जब पड़ोस के बच्चों के साथ खेलते हुए कभी शरारत भी करता था तो मेरे बाबूजी कभी भी डांटा नहीं करते थे. कहने का तात्पर्य है कि श्री माधव के दिल में प्यार का सागर है. प्रेम से अपनी बातों को रखना और दूसरे को समझाना इनके विलक्षण गुण है- उक्त बातें राजीव रंजन “सुधांशु” कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग प्रमंडल , नरकटियागंज ने विगत 13 अक्टूबर को श्रद्धांजलि पुष्प अर्पण के दौरान कहीं.

सुधांशु ने आगे कहा कि महावीर प्रसाद सिंह ‘माधव’ के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जन्म 19 मार्च 1923 ईस्वी बिहार प्रदेश के मुंगेर जिला के हवेली खड़कपुर, थाना +प्रखंड के बडी मझगांव में हुआ था, उनकी शिक्षा-दीक्षा, बी ए ,बी टी , विशारद रहा साथ ही 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका महत्वपूर्ण रही. उनकी शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राजकीय बुनियादी शिक्षा विभाग बिहार सरकार के द्वारा वयोवृद्ध साहित्य सम्मान पुरस्कार 2010, बिहार सरकार, बाबा भीम साहब अंबेडकर फेलोशिप, विद्या वाचस्पति, काव्य भूषण सम्मानित, प्रशस्ति, अभिनंदन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित, किए गए थे. आगे उन्होंने बताया कि श्री माधव जी का करीब 45 पुस्तकें भी छपी हुई थी. इस मौके पर कई साहित्यकार, बुद्धिजीवी, गणमान्य और परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे.