उपेंद्र कुशवाहा : मलाई भी खा रहे हैं, खीर भी पका रहे हैं, मोदी को औकात बता रहे हैं

उपेंद्र कुशवाहा, नरेंद्र मोदी व लालू यादव का फाइल फोटो

लाइव सिटीज (पारुल पांडेय) : उपेंद्र कुशवाहा फिर से बिहार की पॉलिटिक्‍स में ट्रेंड कर रहे हैं. सच में, वे ट्रेंड करने की कला जान गए हैं. बगैर अंतिम फैसला किए मीडिया स्‍पेस चुरा लेते हैं. सभी बड़े पोलिटिकल ड्राइंग रूम में बहस के केंद्र में आ जाते हैं. क्‍या और कब करेंगे, सब कयास ही लगाते रहते हैं. अब कुशवाहा ने बिहार में यदुवंशी (यादव) – कुशवंशी (कुशवाहा) की खीर संगे-संग पंचमेवा (अति पिछड़ी जातियां) की बात क्‍या न कह दी, तापमान बहुते गरम हो गया है. तेजस्‍वी यादव बांहें खोलकर वेलकम करने को तैयार हैं. भाजपा के स्‍टेट प्रेसीडेंट नित्‍यानंद राय को पब्लिक को सोशल साइंस समझाना पड़ रहा है.

फेसबुक पर तो उपेंद्र कुशवाहा छाए ही हुए हैं. जिन्‍हें राजनीति-बाजनीति में दिलचस्‍पी है, खुलकर लिख रहे हैं. पोलिटिकल पंडितों ने कुशवाहा को लालू यादव की ओर जल्‍दी जाते देखना शुरू कर दिया है. फेसबुक पर कुशवाहा का सावन–भादो कैसा चल रहा है, बहुत एक्टिव रहनेवाली कुमुद सिंह की टिप्‍पणी से समझिए– ‘मोदी को कोई औकात बता रहा है तो वो उपेंद्र कुशवाहा हैं. मलाई भी खा रहे हैं और खीर भी पका रहे हैं.’ कुमुद सिंह की तीन पंक्तियों का यह पोस्ट कुशवाहा के मौजूदा राजनीतिक वजूद को बहुत अच्‍छे तरीके से बयां कर देता है.

उपेंद्र कुशवाहा इस्‍तीफा नहीं देंगे
थोड़ा फ्लैश बैक में चलें. केंद्र में मंत्रिपरिषद में बदलाव होना था. मंत्री राजीव प्रताप रुडी फ्लाइट से पटना आ रहे थे. मोबाइल बंद था. जैसे ही पटना उतरे, मोबाइल खोला, मिस्‍ड कॉल के अलर्ट भरे पड़े थे. अमित शाह के यहां से भी कॉल था. कुछ समझते, उसके पहले ही फिर से घंटी बज गई. एयरपोर्ट से ही दूसरी फ्लाइट से दिल्‍ली आने को कहा गया.

नरेंद्र मोदी व अमित शाह का फाइल फोटो

रुडी दिल्‍ली लौटे. अमित शाह से मुलाकात हुई. इस्‍तीफा ले लिया गया. बताया जाता है कि तब इस्‍तीफा कुशवाहा से भी लिया जाना था. कारण कि पहले से लालू प्रसाद के साथ बढ़ते रिश्‍ते की खबर भाजपा को थी. चर्चा रही कि कुशवाहा को कॉल भी किया गया था. इस्‍तीफा देने को कहा गया. पर, कुशवाहा ने मना कर दिया. कहा– आप चाहें तो बर्खास्‍त कर दें. दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा को इस्‍तीफा और बर्खास्‍तगी के बाद जाने वाले संदेशों का पता था.

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उपेंद्र कुशवाहा का फाइल फोटो

कुशवाहा को बर्खास्‍त कर मंत्री पद से नहीं हटाया जा सका. डर था– बिहार के कुशवाहों में बहुत गलत संदेशा चला जाएगा. कुशवाहा बैठे–बैठाए हीरो बन जायेंगे. हालांकि इस पूरे प्रकरण में उपेंद्र कुशवाहा ने बाद में सफाई भी दी थी. बोले थे– नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस्‍तीफा मांगते, तो मुझे न देने की हिम्‍मत कहां थी. इस तरह कुशवाहा ने चतुराई से सब कुछ मनमाफिक कर लिया था.

तेजस्‍वी यादव वेलकम को तैयार हैं
सच है, माडिया जब भी पूछती है, तो उपेंद्र कुशवाहा नरेंद्र मोदी का गुणगान कर देते हैं. लेकिन लालू यादव से भी मिलने चले जाते हैं. खुद फोटो अपलोड करते हैं और दुनिया को बता देते हैं. अब जबकि 2019 करीब आता जा रहा है, उपेंद्र कुशवाहा को इधर या उधर का फैसला लेना ही होगा. तेजस्‍वी यादव तो राजद में वेलकम करने को तैयार कब से बैठे हैं. शर्त बस इतनी है कि 2020 के चुनाव में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी न मांगें.

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तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

अब जब शनिवार 25 अगस्‍त को बीपी मंडल को याद करने के बहाने कुशवाहा ने यदुवंशी-कुशवंशी संगे संग पंचमेवा से खीर बनाने की बात कही, तो तेजस्‍वी स्‍वागत करने को दरवाजे पर ही खड़े हो गए हैं. तेजस्‍वी का ट्वीट पढि़ए– ‘नि:संदेह उपेंद्र जी, स्‍वादिष्‍ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की जरुरत है. पंचमेवा के स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक गुण ना केवल शरीर बल्कि स्‍वस्‍थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं. प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्‍वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है. यह एक अच्‍छा व्‍यंजन है.’ अब इसे पढ़कर आपने समझ ही लिया होगा कि राजद के भीतर कुशवाहा का इंतजार कितना अधिक हो रहा है.

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बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय.

नित्‍यानंद राय बोल रहे हैं, सब कुछ जाति नहीं
उपेंद्र कुशवाहा के बयान के बाद उठे तूफान पर भाजपा के बिहार प्रेसीडेंट नित्‍यानंद राय को भी बोलना पड़ा है. कारण कि कुशवाहा की पार्टी रालोसपा अभी एनडीए में है. रालोसपा इधर-उधर जाती है, तो निश्चित तौर पर 2019 प्रभावित होगा.

सो, उपेंद्र कुशवाहा की खीर वाले बयान पर सफाई देते हुए नित्‍यानंद राय ने कहा– दूध और चावल किसी जाति विशेष का नहीं है. देश में अब जाति विशेष की पॉलिटिक्‍स नहीं चलती है, सबों को साथ लेकर चलना होता है.

आखिर में, लब्‍बोलुबाब यही कि उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में एनडीए के भविष्‍य को लेकर फिर से कई संकेत दिए हैं. आने वाले महीनों में कुशवाहा को तय करना ही होगा कि वे 2019 में रहेंगे कहां? मतलब, एनडीए के साथ कि महागठबंधन के साथ.

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